पीएनजी लाइन बिछाने में बड़ी लापरवाही, 25 किमी की अनुमति, 50 से ज्यादा में खोदीं सड़कें

Newswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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गुरुग्राम में पीएनजी नेटवर्क के विस्तार के तहत गैस एजेंसियों ने नियमों की अनदेखी की है। नगर निगम से केवल 25 किलोमीटर की अनुमति ली गई थी, लेकिन 50 किलोमीटर से अधिक खुदाई की गई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाले एजेंसियों के खिलाफ नोटिस भेजे जाएंगे।

पीएनजी लाइन बिछाने में बड़ी लापरवाही, 25 किमी की अनुमति, 50 से ज्यादा में खोदीं सड़कें

गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। गुरुग्राम में पीएनजी (पाइप वाली प्राकृतिक गैस) नेटवर्क के विस्तार के नाम पर भारी मनमानी और प्रशासनिक लापरवाही सामने आ रही है। सरकार द्वारा एलपीजी का बोझ कम करने के निर्देशों के बीच गैस एजेंसियां नियमों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि एजेंसियों ने नगर निगम से केवल 25 किलोमीटर लाइन बिछाने की अनुमति ली है, लेकिन धरातल पर 50 किलोमीटर से अधिक हिस्से में खुदाई कर दी गई है। जिस 25 किलोमीटर क्षेत्र की अनुमति ली गई है, उसकी भी पूरी फीस अभी तक निगम में जमा नहीं कराई गई है।

नगर निगम (एमसीजी) के इंजीनियरों ने बताया कि गैस एजेंसियां तय ट्रेंचलेस (बिना गड्ढा खोदे) तकनीक को नजरअंदाज कर सीधे मैनुअल खुदाई कर रही हैं। इससे जमीन के नीचे मौजूद पानी और सीवर की पुरानी लाइनें टूट रही हैं। सड़कों और फुटपाथों को बुरी तरह तोड़कर लाइनें बिछाई जा रही हैं, लेकिन काम पूरा होने के बाद इनकी मरम्मत नहीं हो रही है। बिना सर्वे और फीस के चल रहे इस काम से स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।निगम आयुक्त ने दी सख्त चेतावनीनगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि शहर में गैस नेटवर्क बिछा रही एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों को बैठक के लिए बुलाया जाएगा। नेटवर्क बिछाने की जल्दबाजी में वह हमारे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा रहे हैं और नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। हम नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें तुरंत नोटिस भेजेंगे।पालम विहार और सेक्टर 15 में बुरा हालपालम विहार के वार्ड 4 के पार्षद प्रदीप कुमार पदम ने बताया कि एजेंसी ने मंगलवार को ई-ब्लॉक में काम करते समय पानी की लाइन तोड़ दी। भारी मशक्कत से इसे ठीक कराया गया, तो उसी रात उन्होंने खुदाई करके दूसरी लाइन भी तोड़ दी। कार्यकारी अभियंता संदीप सिहाग ने कहा कि एजेंसियों को काम सुधारने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। इंजीनियरों के अनुसार, खुदाई से पहले जमीन के नीचे बिछी लाइनों का पता लगाने के लिए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार सर्वे (जीपीआरएस) करना अनिवार्य है। लेकिन एजेंसियां यह सर्वे नहीं कर रही हैं। अगर पानी की लाइन तीन फीट पर है और गैस की लाइन पांच फीट पर डालनी है, तो इसका ध्यान न रखने से नुकसान होना तय है।

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