मुख्यालय की लापरवाही का दंश झेल रहे शहरवासी, कूड़े के ढेरों में तब्दील हो रहा शहर
- टेंडर प्रक्रिया में बार-बार हो रहे बदलाव, अब पुराने टेंडर को रद्द कर नए सिरे से होगी शुरुआत

गुरुग्राम, वरिष्ठ संवाददाता। शहर में कूड़े और गंदगी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए नगर निगम कोई स्थायी समाधान निकालने के बजाय सिर्फ अस्थायी टेंडरों के सहारे चल रहा है। शहरी स्थानीय निकाय के अफसरों को निगम की आरएफपी (निविदा प्रस्ताव) पसंद नहीं आ रही है, जिसके कारण मुख्यालय की लापरवाही का पूरा दंश आम शहरवासियों को झेलना पड़ रहा है। हालत यह है कि न तो घरों से कूड़ा उठाने के लिए कोई टेंडर सिरे नहीं चढ़ पा रहा है और न ही बंधवाड़ी प्लांट में ताजा कूड़े के निस्तारण को लेकर निगम कोई एजेंसी मिल रही है।
शहर के लाखों लोग शहरी स्थानीय निकाय विभाग स्तर पर हो रही इस अनदेखी से बेहाल हैं। बीते दो सालों में निगम पांच से ज्यादा बार मुख्यालय को कूड़े के निस्तारण का प्रस्ताव भेज चुका है। एक तरफ जहां पड़ोसी शहरों फरीदाबाद और मानेसर में घरों से कूड़ा उठाने का काम सुचारू रूप से शुरू हो चुका है, वहीं गुरुग्राम नगर निगम अभी भी टेंडर की कागजी उलझनों में ही फंसा हुआ है। इसके अलावा, मलबा निस्तारित करने के लिए नया प्लांट लगाने को निगम को जमीन तक नहीं मिल पा रही है।सफाई व्यवस्था बेहतरीन के लिए जब तक स्थायी टेंडर सिरे नहीं चढ़ता है तब तक अस्थायी टेंडर लगाकर निजी एजेंसियों को काम सौंपा गया है। ताकि लोगों को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो।- प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम।
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