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फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट मामले में पूर्व सीईओ और फार्मासिस्ट को दस माह की जेल

फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट मामले में पूर्व सीईओ और फार्मासिस्ट को दस माह की जेल

संक्षेप: अदालत से:गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। गुरुग्राम की जिला अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आईआरईओ कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश संका और र

Tue, 4 Nov 2025 11:23 PMNewswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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गुरुग्राम, प्रमुख संवाददाता। गुरुग्राम की जिला अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आईआरईओ कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश संका और राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की तत्कालीन महिला फार्मासिस्ट मीनू शर्मा को फर्जीवाड़ा करने के जुर्म में दस महीने की सजा और जुर्माने की सजा सुनाई। यह सजा अदालत को गुमराह करने के लिए जानबूझकर झूठा मेडिकल सर्टिफिकेट पेश करने के मामले में दी गई है। इस फर्जीवाड़े के मामले में शिवाजी नगर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। दरअसल यह पूरा विवाद आईआरईओ कंपनी की शिकायत से जुड़ा है। कंपनी ने सेक्टर- 65 थाना पुलिस में पूर्व सीईओ रमेश संका के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

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शिकायत में कहा गया था कि संका ने 28 दिसंबर 2016 को कंपनी छोड़ते समय गोपनीयता, गैर-प्रतिस्पर्धा और गैर-मानहानि के समझौते का उल्लंघन किया। कंपनी का आरोप था कि रमेश संका ने कंपनी के क्लाइंट का महत्वपूर्ण डेटा अपने पास रख लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर एक पार्टनरशिप की और जानबूझकर कंपनी के खिलाफ फर्जी मामले दर्ज कराने की कोशिश की। कंपनी के पास एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी होने का दावा किया गया था, जिसमें संका कथित तौर पर पैसे लेकर शिकायत वापस लेने की बात कर रहे थे। फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट की साजिश इसी मुख्य मामले की सुनवाई 17 अप्रैल 2023 को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास विनय काकराण की अदालत में होनी थी। इस दौरान रमेश संका के पक्ष की ओर से राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का एक मेडिकल सर्टिफिकेट पेश किया गया। इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि सीईओ रमेश संका बीमार हैं और अदालत में पेश नहीं हो सकते। हालांकि दूसरे पक्ष ने इस प्रमाण पत्र पर आपत्ति जताते हुए विरोध किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए इसकी जांच के आदेश दिए। पुलिस जांच में सामने आया सच पुलिस ने जब मामले की जांच की, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उस विशेष दिन रमेश संका इलाज के लिए अस्पताल गए ही नहीं थे। यह भी पता चला कि उन्होंने अस्पताल की तत्कालीन फार्मासिस्ट मीनू शर्मा की सहायता से यह जाली मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाया था, जिसका इस्तेमाल अदालत को गुमराह करने के लिए किया जाना था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें, सबूतों और पुलिस जांच रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए रमेश संका और मीनू शर्मा को दोषी पाया और उन्हें दस महीने की कैद के साथ-साथ 1500-1500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।