Gurgaon News: फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर ब्लैकलिस्ट होंगी फर्म, निगम आयुक्त सख्त
Gurgaon News: - ड्राफ्ट्समैन से मांगा स्पष्टीकरण, धोखाधड़ी के आरोपों पर दर्ज होगी एफआईआर- ड्राफ्ट्समैन से मांगा स्पष्टीकरण, धोखाधड़ी के आरोपों पर दर्ज होगी एफआईआर

Gurgaon News: गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। नगर निगम में फर्जी कागजों के आधार पर लाखों रुपयों के टेंडर लेने वाले कम्प्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ कड़ी कर्रवाई करेगा। निगम की जांच में खुलासा हुआ है कि कम्प्यूटर ऑपरेटर के पिता और भाई ही निगम में ठेकेदार हैं। शुरुआती जांच के चौंकाने वाले निष्कर्षों के आधार पर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने संबंधित ड्राफ्ट्समैन सोमबीर से तत्काल स्पष्टीकरण मांगने के साथ-साथ निर्धारित नियमों का पालन करते हुए दोषी फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा, टेंडर प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने, जाली रिकॉर्ड प्रस्तुत करने और निगम के साथ धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोपों के आधार पर दोषी कर्मचारी और संबंधित फर्मों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
यह है पूरा मामला
- यह है पूरा मामला
बता दें कि नगर निगम में कम्प्यूटर ऑपरेटर द्वारा अपने पिता और भाई केनाम पर फर्म और सोसायटी बनाकर निगम में टेंडर लेने और कम्प्यूटर ऑपरेटर द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार करके टेंडर लेने का आरोप लगा था। कम्प्यूटर ऑपरेटर निगम में टेंडर खोलने का काम करता है और टेंडर में आई एजेंसियों के कागजों की जाचं करता है। कम्प्यूटर ऑपरेटर ने अपनी फर्म के नाम फर्जी कागज तैयार करके करीब 70 लाख रुपये के टेंडर अपने नाम पर जारी करवा लिए। जो ठेकेदार इन टेंडर में आवेदन सही थे उनको यह टेंडर नहीं मिले। इसको लेकरनिगम आयुक्त को संदीप राठी ठेकेदार ने शिकायत की थी। जिसे आपके अपने हिन्दुस्तान अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर पर संज्ञान लेते हुए निगम आयुक्त ने मामले की जांच अतिरिक्त निगम आयुक्त को सौंपी है।
अपनों को ही टेंडर बांटने का आरोप
- अपनों को ही टेंडर बांटने का आरोप
मामले की विस्तृत जांच में यह बात सामने आई है कि संबंधित ड्राफ्ट्समैन ने कथित अनियमितताओं के संबंध में नगर निगम के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए। सरकारी रिकॉर्ड और जांच के तथ्यों के अनुसार, जिन फर्मों को टेंडर प्रक्रिया में लाभ पहुंचाया जा रहा था, उनमें ड्राफ्ट्समैन के पिता और अन्य करीबी रिश्तेदार ही मालिक या साझेदार के तौर पर जुड़े हुए थे। इस स्थिति के बावजूद ड्राफ्ट्समैन ने न तो अपने उच्च अधिकारियों को इस बात की जानकारी दी और न ही उसने खुद को टेंडर आवंटन की इस पूरी प्रक्रिया से अलग किया। जांच रिपोर्ट में इस कृत्य को सीधे तौर पर 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' (हितों का टकराव) और पद के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना गया है। निगम आयुक्त ने पूरे प्रकरण को सेवा नियमों का घोर उल्लंघन मानते हुए ड्राफ्ट्समैन के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर ब्लैकलिस्ट होंगी फर्में
- फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर ब्लैकलिस्ट होंगी फर्में
जांच के दौरान यह बात भी उजागर हुई है कि संबंधित फर्मों ने टेंडर हासिल करने और तकनीकी योग्यताओं को पूरा करने के लिए कथित रूप से फर्जी और जाली दस्तावेजों का सहारा लिया। निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने सख्त लहजे में कहा कि नगर निगम की किसी भी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि पूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करते हुए और संबंधित पक्षों को नियमानुसार अपनी बात रखने का अवसर देते हुए इन फर्मों को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए। निगम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी एजेंसी जाली दस्तावेजों, गलत जानकारियों या अनुचित प्रभाव के माध्यम से सरकारी टेंडर हासिल नहीं कर सके।
अधिकारियों पर भी कसना शुरू हुआ शिकंजा
- अधिकारियों पर भी कसना शुरू हुआ शिकंजा
निगम आयुक्त ने इस पूरे घालमेल में केवल निचले स्तर के कर्मचारी तक ही कार्रवाई को सीमित नहीं रखा है, बल्कि इस प्रक्रिया से जुड़े वरिष्ठ इंजीनियरिंग अधिकारियों को भी जांच के दायरे में ला दिया है। निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने मुख्य अभियंता को निर्देश दिए हैं कि वह पूरे मामले की एक व्यापक एवं विस्तृत स्क्रूटनी रिपोर्ट दोबारा तैयार कर प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट में संबंधित क्षेत्र के कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता की भूमिका और जिम्मेदारी की विशेष रूप से जांच की जाएगी। चीफ इंजीनियर को यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं कि टेंडर दस्तावेजों की तकनीकी जांच और वेरिफिकेशन के दौरान संबंधित अधिकारियों के स्तर पर कोई लापरवाही, जानबूझकर की गई चूक या अनुचित मिलीभगत हुई है या नहीं। निगम आयुक्त ने साफ किया कि यदि किसी भी स्तर पर किसी अधिकारी की जवाबदेही बनती है, तो सहायक रिकॉर्ड के साथ उसकी जिम्मेदारी तय की जाए और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाए।
कोट:
- कोट:
नगर निगम की पूरी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। टेंडर प्रक्रिया में हितों के टकराव, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल अथवा किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी के मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच में दोष सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित कर्मचारी, अधिकारी अथवा फर्म-जो भी इस भ्रष्टाचार में शामिल पाया जाएगा-उसके खिलाफ नियमानुसार कठोरतम कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम
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