सीजफायर से बाजार में जान, निर्यातकों को राहत की आस
गुरुग्राम के कारोबारी खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और दो हफ्तों के सीजफायर से राहत और संशय का अनुभव कर रहे हैं। पिछले दिनों में ऑर्डर रुकने और कीमतों में अस्थिरता के बाद, अब हल्की तेजी आई है। हालांकि, व्यापारियों की चिंता अभी भी बनी हुई है, खासकर तेल और लॉजिस्टिक्स लागत को लेकर।

गुरुग्राम,साक्षी रावत। खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव और फिर अचानक घोषित दो हफ्तों के सीजफायर ने साइबर सिटी के कारोबारियों को एक साथ राहत और संशय दोनों का एहसास कराया है। पिछले दिनों तक जहां ऑर्डर रुकने, शिपमेंट अटकने और कीमतों में अनिश्चितता से कारोबारी परेशान थे, वहीं अब बाजार में आई हल्की तेजी ने उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। शेयर बाजार में आई तेजी का असर गुरुग्राम के व्यापारिक माहौल पर भी दिखा। शहर के उद्योग विहार और सेक्टर-37 के कई निर्यातकों का कहना है कि क्लाइंट्स ने दोबारा बातचीत शुरू की है। ऑटो कंपोनेंट्स के एक निर्यातक ने बताया कि पिछले हफ्ते तक यूरोप और मिडिल ईस्ट के ऑर्डर होल्ड पर थे।
अब पूछताछ फिर से आने लगी है, लेकिन सभी वेट एंड वॉच मोड में हैं।दरअसल, कारोबारियों की सबसे बड़ी चिंता तेल और लॉजिस्टिक्स लागत को लेकर रही। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर जोखिम बढ़ गया था। इसका सीधा असर फ्रेट रेट पर पड़ा, जो कई मामलों में 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गया। पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक इंडस्ट्री से जुड़े एक कारोबारी के मुताबिक अगर जलडमरूमध्य सुरक्षित रहता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य होगी और लागत में राहत मिलेगी। अभी हर डील में जोखिम प्रीमियम जुड़ गया है।खाड़ी युद्ध के असर से गुरुग्राम का निर्यात सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ। रेडीमेड गारमेंट, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मा और ऑटो कंपोनेंट्स इन चार सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। स्थानीय एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अनुमान के मुताबिक, पिछले 10-12 दिनों में 20 से 30 प्रतिशत तक शिपमेंट प्रभावित हुए। कई कंटेनर दुबई और सऊदी अरब के पोर्ट्स पर अटक गए, जिससे डिलीवरी टाइमलाइन बिगड़ गई।उद्योग विहार के एक कपड़ा निर्यातक उमेश गुप्ता ने बताया कि हमारा माल दुबई पोर्ट पर 8-10 दिन अटका रहा। क्लाइंट ने पेनल्टी लगा दी। हमें मजबूरी में कीमत 10 फीसदी तक कम करनी पड़ी। वहीं, कुछ छोटे व्यापारियों ने नुकसान से बचने के लिए स्टॉक को घरेलू बाजार में सस्ते दामों पर निकालना शुरू कर दिया। हालांकि बड़े निर्यातकों ने रणनीति बदलते हुए शिपमेंट रोकने और वैकल्पिक रूट तलाशने की कोशिश की। लॉजिस्टिक्स कंपनियों के अनुसार, कुछ कार्गो को ओमान और अन्य सुरक्षित मार्गों के जरिए डायवर्ट किया गया, लेकिन इससे लागत और समय दोनों बढ़े हैं।सीजफायर के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह राहत स्थायी होगी या महज अस्थायी ठहराव। गुरुग्राम के एक सीनियर कारोबारी कहते हैं कि दो हफ्ते का समय हमें बैकलॉग क्लियर करने का मौका देगा, लेकिन अगर फिर तनाव बढ़ा तो हालात और खराब हो सकते हैं। फिलहाल बाजार में हलचल जरूर लौटी है, लेकिन भरोसा पूरी तरह नहीं। ऑर्डर आ रहे हैं, पर सावधानी के साथ। कीमतों पर बातचीत हो रही है, पर शर्तों के साथ।
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