
गांव भांगरौला की बजाय नाहरपुर कासन में बस डिपो बनेगा
संक्षेप: गुरुग्राम, कार्यालय संवाददाता। गांव भांगरौला की बजाय गांव नाहरपुर कासन में बस डिपो का निर्माण किया जाएगा। बुधवार को इस बस डिपो के निर्माण के मद्देनजर
गुरुग्राम। गांव भांगरौला की बजाय गांव नाहरपुर कासन में बस डिपो का निर्माण किया जाएगा। बुधवार को इस बस डिपो के निर्माण के मद्देनजर जीएमडीए और एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों ने बस डिपो के लिए प्रस्तावित जमीन का निरीक्षण किया। जीएमडीए ने एचएसआईआईडीसी से आग्रह किया कि इस जमीन को जल्द उन्हें सौंपा जाए, जिससे डीपीआर तैयार करवाने की प्रक्रिया को शुरू किया जा सके। जीएमडीए ने गांव भांगरौला में बस डिपो निर्माण के लिए 9.2 एकड़ जमीन देखी थी। मानेसर नगर निगम अंतर्गत आ रही इस जमीन को मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में जीएमडीए की बैठक में रखा था।

मुख्यमंत्री ने आदेश जारी किए थे कि इस बस डिपो को पीपीपी मोड पर तैयार किया जाए। इस जमीन तक जा रहे रास्ते की चौड़ाई सिर्फ साढ़े पांच मीटर थी। सलाहकार कंपनी ने रिपोर्ट दी कि बस डिपो के लिए कम से कम 12 मीटर की जमीन की जरूरत है। यदि पीपीपी मोड पर इसको तैयार करवाना है तो रास्ते की चौड़ाई कम से कम 24 मीटर चाहिए होगी। मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखा तो मुख्य सड़क के साथ लगती जमीन को तलाशने के आदेश जारी हुए। इसके बाद जीएमडीए ने गांव नाहरपुर कासन में करीब 10 एकड़ जमीन देखी। यह जमीन 60 मीटर चौड़ी सड़क पर है। जीएमडीए के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने जून माह में एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक के समक्ष मामला रखा। जमीन नहीं मिलने की वजह से बस डिपो के निर्माण में देरी हो रही थी। ऐसे में मामले से मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया। इसको लेकर जीएमडीए और एचएसआईआईडीसी ने मौके का निरीक्षण किया। सर्कल रेट के हिसाब से जीएमडीए की तरफ से एचएसआईआईडीसी को जमीन का भुगतान करना होगा। यूएमआई सम्मेलन में मुख्यमंत्री के समक्ष रखा मामला यूएमआई सम्मेलन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदर्शन का निरीक्षण किया था। प्रदर्शनी में गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड (जीएमसीबीएल) ने प्रदर्शनी लगाई हुई थी। सैनी ने निरीक्षण के दौरान बसों के बारे में जानकारी ली। उन्हें पता चला कि 200 सिटी बस जीएमसीबीएल के पास है। पीएम ई-सेवा से 200 इलेक्ट्रिक बस आ रही हैं। मुख्यमंत्री के समक्ष यह भी रखा गया कि मानेसर में बस डिपो तैयार करने के लिए जमीन नहीं मिली है। यह मामला उठने के बाद एचएसआईआईडीसी ने जमीन को जीएमडीए के हवाले करने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। रोजाना एक लाख रुपये का नुकसान जीएमडीए के अधिकारी मानेसर में पिछले तीन साल से सिटी बस डिपो तैयार करने के लिए जमीन मांग रहे थे, लेकिन उन्हें जमीन नहीं दी जा रही थी। मौजूदा समय में मानेसर में रोजाना 25 सिटी बस चलती हैं। रात को रूकने की जगह नहीं होने की वजह से सिटी बस को वापस लौटना पड़ता है। सूत्रों के मुताबिक खाली बस चलने से हरियाणा सरकार को रोजाना करीब एक लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।

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