
तीन विभागों को कोर्ट ने नोटिस दिया
गुरुग्राम जिला बार एसोसिएशन ने कोर्ट परिसर में अव्यवस्था, खराब सुविधाओं और आवारा पशुओं के आतंक के खिलाफ याचिका दायर की है। उन्होंने नगर निगम और प्रशासन पर समस्याओं के समाधान में असफल रहने का आरोप लगाया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर समस्याओं का समाधान करने के लिए समय सीमा दी है।
गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। गुरुग्राम जिला बार एसोसिएशन ने कोर्ट परिसर के अंदर व्याप्त घोर अव्यवस्था, खराब नागरिक सुविधाओं और आवारा पशुओं के आतंक को लेकर गुरुग्राम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। एसोसिएशन ने नगर निगम गुरुग्राम, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और जिला प्रशासन पर बार-बार की शिकायतों के बावजूद समस्याओं का समाधान न करने का आरोप लगाया है। गुरुवार को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) मनीष कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जीएमडी, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर दिया है। एक निश्चित समय सीमा के साथ इन समस्याओं को ठीक करने के लिए कार्य योजना (प्लान) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
याचिका में न्याय के मंदिर की बदहाली का आरोप बार एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि कोर्ट परिसर का उपयोग प्रतिदिन हजारों न्यायिक अधिकारियों, वकीलों, पुलिसकर्मियों और वादियों द्वारा किया जाता है। इसके बावजूद स्थिति बेहद दयनीय है। याचिका में खराब जल निकासी (ड्रेनेज), दोषपूर्ण सीवरेज, अपर्याप्त स्वच्छता, और टूटी-फूटी आंतरिक सड़कों का उल्लेख किया गया है। परिसर में फैली गंदगी, दुर्गंध और मच्छरों के प्रजनन स्थलों के कारण यहां अस्वच्छ और असहनीय स्थिति बन गई है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि सीवरेज प्रणाली वर्षों से काम नहीं कर रही है। आवारा पशुओं (कुत्तों और बंदरों) के कुप्रबंधन ने कोर्ट परिसर में भारी उपद्रव पैदा कर दिया है। बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने कहा कि न्यायालयों को न्याय का मंदिर कहा जाता है,लेकिन प्रतिवादियों (अधिकारियों) के सुस्त रवैये और खराब प्रबंधन के कारण, यह परिसर हजारों कर्मियों के लिए एक अस्वच्छ, गंदा, बदबूदार और बीमारी फैलाने वाला स्थान बन गया है। दोषारोपण का खेल के कारण बढ़ रही दिक्कत याचिका में उल्लेख किया गया है कि कोर्ट परिसर की ऐसी स्थिति अधिकारियों की पूरी तरह विफलता है। शांडिल्य ने बताया कि नागरिक बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है,जबकि साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। जीएमडीए परिसर के बाहरी बुनियादी ढांचे के लिए जिम्मेदार है। शांडिल्य के अनुसार एजेंसियां दोषारोपण के खेल में लगी हुई हैं और कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

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