चिंताजनक: गुरुग्राम को सालभर में सिर्फ 80 दिन साफ हवा मिली
गुरुग्राम की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। सीआरईए की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में गुरुग्राम के निवासियों को केवल 80 दिन ही साफ हवा मिली। प्रदूषण के मामले में शहर चौथे स्थान पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के पीएम 2.5 स्तर में गिरावट मानवीय प्रयासों की बजाय प्राकृतिक कारणों से हुई है।
गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। साइबर सिटी गुरुग्राम की चमक-धमक के पीछे एक कड़वी सच्चाई छिपी है। यहां की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) द्वारा जारी साल भर के आंकड़ों ने बेहद डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 के 365 दिनों में से गुरुग्राम के निवासियों को केवल 80 दिन ही ऐसी हवा मिली, जिसे साफ श्रेणी में रखा जा सके। बाकी के पूरे साल लोग प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर रहे। प्रदूषण के मामले में चौथे नंबर पर गुरुग्राम सीआरईए के डेटा विश्लेषण से पता चला है कि दिल्ली-एनसीआर के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गुरुग्राम चौथे स्थान पर रहा है।
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं, वाहनों का भारी दबाव और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल ने शहर के पर्यावरण को बुरी तरह प्रभावित किया है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहर की हवा का एक बड़ा हिस्सा (127 दिन) खराब से बेहद खराब श्रेणी में रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पीएम 2.5 के स्तर में मामूली गिरावट, मानसून का रहा साथ रिपोर्ट में एक राहत भरी खबर यह भी है कि गुरुग्राम की प्रदूषित हवा में पीएम 2.5 का औसत स्तर बीते नौ सालों के मुकाबले कम दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे मानवीय प्रयासों से ज्यादा प्रकृति का हाथ रहा है। सीआरईए के विश्लेषक मनोज कुमार ने बताया कि इस साल मानसून की अवधि लंबी रही और बारिश के अधिक दिनों तक चलने के कारण हवा में मौजूद धूल और सूक्ष्म कण जमीन पर बैठ गए। बारिश ने एक प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम किया, जिससे साल के कुछ दिनों में प्रदूषण का स्तर कम रहा। नौ सालों का सबसे कम प्रदूषण स्तर आंकड़े बताते हैं कि 2015 के बाद से यह पहला साल है जब पीएम 2.5 के औसत स्तर में कुछ सुधार देखा गया है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इसे सुधार के बजाय अस्थाई राहत के रूप में देखा जाना चाहिए। मानसून के जाते ही और सर्दियों के शुरू होते ही प्रदूषण का स्तर फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा 73 दिन बेहद खराब हवा का मतलब है कि गुरुग्राम के लोगों ने साल का एक बड़ा हिस्सा ऐसी हवा में बिताया जो सीधे तौर पर फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों को जन्म देती है। डॉक्टरों के अनुसार पीएम 2.5 का स्तर बढ़ने से बच्चों और बुजुर्गों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस फूलने की समस्या तेजी से बढ़ी है। दिल्ली-एनसीआर में सबसे साफ गुरुग्राम की रही हवा नए साल के दूसरे दिन शुक्रवार को गुरुग्राम की हवा सबसे साफ रही। गुरुग्राम का एक्यूआई 187 और मानेसर का एक्यूआई 108 दर्ज किया गया। गुरुग्राम की हवा में प्रदूषण का स्तर तीन गुना तक ज्यादा रहा और हवा मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई। जबकि शुक्रवार को दिल्ली का एक्यूआई 236, फरीदाबाद का एक्यूआई 210,गाजियाबाद का एक्यूआई 239 और नोएडा का एक्यूआई 229 दर्ज किया गया। गुरुग्राम को छोड़कर चारों शहर में प्रदूषण का स्तर सामान्य से पांच गुना तक ज्यादा रहा और हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई। चार जनवरी तक येलो अलर्ट जारी मौसम विभाग ने शनिवार और रविवार सुबह घना कोहरा होने की संभावना जाहिर करते हुए येलो अलर्ट जारी कर दिया गया। इसके अलावा सुबह 11 बजे तक चली सात से 12 किलोमीटर की ठंडी हवाओं ने परेशान किया। जबकि 11 बजे के बाद निकली धूप ने दिन में लोगों को ठंड से थोड़ी राहत दिलाई। शुक्रवार को गुरुग्राम में अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया,गुरुवार के मुकाबले अधिकतम तापमान में 1.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। जबकि न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया,गुरुवार के मुकाबले न्यूनतम तापमान में 3.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। आंकडे: साफ हवा: 80 दिन संतोषजनक : 78 दिन मध्यम : 70 दिन खराब : 54 दिन बेहद खराब : 73 दिन वर्ष पीएम 2.5 का औसत स्तर 2016 125 2017 153 2018 116 2019 94 2020 82 2021 92 2022 90 2023 90 2024 91 2025 77

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