जनवरी में एक भी दिन साफ हवा नहीं मिली
- डब्ल्यूएचओ के मानकों से 10 गुना ज्यादा दर्ज किया गया प्रदूषण का स्तर

गुरुग्राम, वरिष्ठ संवाददाता। मिलेनियम सिटी गुरुग्राम की हवा अब सांस लेने लायक नहीं रह गई है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर द्वारा जारी जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट ने शहर के पर्यावरण प्रबंधन और स्वच्छता के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी के पूरे 31 दिनों में गुरुग्राम के निवासियों को एक भी दिन साफ हवा नसीब नहीं हुई। लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण गुरुग्राम अब देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में चौथे स्थान पर काबिज हो गया है। आंकड़ों की तुलना करें तो साल 2025 के मुकाबले 2026 में प्रदूषण के स्तर में बड़ी गिरावट आई है।
जहां जनवरी 2025 में गुरुग्राम देश के प्रदूषित शहरों में पांचवें स्थान पर था, वहीं इस साल यह एक पायदान और ऊपर चढ़कर चौथे नंबर पर आ गया है। इस पूरे महीने में शहर का औसत स्तर 163 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। यह स्तर भारत सरकार द्वारा तय सुरक्षित सीमा (60 माइक्रोग्राम) से लगभग तीन गुना और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कड़े मानकों से 10 गुना अधिक खतरनाक है। सीआरईए की रिपोर्ट - शून्य अच्छी हवा:- पूरे 31 दिनों में एक भी दिन हवा की गुणवत्ता अच्छी (0-30) या संतोषजनक (31-60) श्रेणी में नहीं रही। - 22 दिन बहुत खराब श्रेणी:- जनवरी के 70 से अधिक दिन यानी 22 दिन शहरवासियों ने बहुत खराब (121-250) श्रेणी की हवा में सांस ली। - 3 दिन गंभीर संकट:- महीने के 3 दिन प्रदूषण का स्तर गंभीर (250 से ऊपर) श्रेणी को पार कर गया, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को घरों में कैद होना पड़ा। - केवल 6 दिन मामूली राहत:- केवल 2 दिन हवा मध्यम और 4 दिन खराब रही, लेकिन यह भी स्वास्थ्य मानकों पर खरी नहीं उतरी। हरियाणा के 19 शहरों में खतरे की घंटी गुरुग्राम की स्थिति इस कदर गंभीर रही कि जनवरी के 31 में से 25 दिन यह शहर देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में लगातार बना रहा। केवल गुरुग्राम ही नहीं, हरियाणा के अन्य 25 में से 19 शहरों में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से कहीं अधिक दर्ज किया गया। उत्तर भारत के इन शहरों में प्रदूषण का मुख्य कारण अनियंत्रित शहरीकरण, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल, स्थानीय स्तर पर जलने वाला कचरा और वाहनों का अत्यधिक दबाव माना जा रहा है। विशेषज्ञों की राय पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2025 और 2026 की शुरुआत में लगातार एक भी दिन साफ हवा न मिलना यह दर्शाता है कि स्थानीय प्रशासन की प्रदूषण नियंत्रण नीतियां कागजों तक ही सीमित हैं। ग्रैप के नियम लागू होने के बावजूद धरातल पर निर्माण स्थलों और कचरा प्रबंधन में बड़ी कोताही बरती जा रही है। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में सांस की बीमारियों का संकट और गहरा सकता है।
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