सार्वजनिक जगहों से लावारिस खतरनाक कुत्तों को हटाएगा निगम

Newswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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गुरुग्राम में खतरनाक कुत्तों के डर को खत्म करने के लिए निगम ने अभियान शुरू किया है। पकड़े गए कुत्तों को शेल्टर में रखा जाएगा। हाल के चार महीनों में 10,830 लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा है। नगर निगम ने फीडिंग प्वाइंट बनाने के लिए आरडब्ल्यूए को नोटिस जारी किए हैं। नसबंदी अभियान धीमी गति से चल रहा है।

सार्वजनिक जगहों से लावारिस खतरनाक कुत्तों को हटाएगा निगम

गुरुग्राम,कृष्ण कुमार। शहर में सार्वजनिक स्थानों पर खतरनाक कुत्तों के डर को अब समाप्त किया जाएगा। निगम की तरफ से सार्वजनिक जगहों पर खतरनाक और पागल कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा। पकड़े गए इन कुत्तों को निगम के चार एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटरों में बने शेल्टर में रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी हालिया आदेशों के बाद निगम प्रशासन अब पूरी तरह हरकत में आया है। नए निर्देशों के तहत रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, प्रमुख बाजारों और मंदिरों के आसपास घूमने वाले खतरनाक व हिंसक लावारिस कुत्तों को तुरंत प्रभाव से हटाया जाएगा। निगम अधिकारियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी निकायों को शहर की सार्वजनिक जगहों पर लावारिस घूम रहे कुत्तों को पकड़कर उन्हें शेल्टर भेजने के आदेश दिए हैं, लेकिन नगर निगम के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती पकड़े गए कुत्कों को सुरक्षित रखने की है, क्योंकि वर्तमान में निगम के पास लावारिस कुत्तों को रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। मौजूदा समय में निगम के पास केवल 250 कुत्तों को रखने की ही सीमित सुविधा उपलब्ध है। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेशों के अनुसार, सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए इन खतरनाक कुत्तों को अधिकारी वापस उसी जगह पर नहीं छोड़ सकेंगे, जिससे स्थानीय निवासियों को दोबारा खतरा पैदा हो।

चार महीनों में रहा कुत्तों का आतंक

शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अप्रैल तक महज चार महीनों में दस हजार 830 लोगों को आवारा कुत्ते काट चुके हैं। आंकड़ों से साफ है कि शहर में हर महीने 2500 से ज्यादा लोगों को आवारा कुत्ते अपना शिकार बना रहे हैं। नागरिक अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक शहर में फिलहाल 35 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की संख्या मौजूद है, जो जनता के लिए बड़ी परेशानी बन चुके हैं।

आरडब्ल्यूए को फीडिंग प्वाइंट बनाने के नोटिस जारी

नगर निगम ने शहर की विभिन्न आरडब्ल्यूए को सोसायटियों के अंदर निर्धारित फीडिंग प्वाइंट बनाने के लिए नोटिस भी जारी किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सोसायटियों और आम सार्वजनिक स्थानों पर अनियंत्रित तरीके से किसी भी जगह कुत्तों को खाना खिलाने से समस्या और ज्यादा बढ़ रही है। इससे कुत्ते आक्रामक हो रहे हैं। इसी को रोकने के लिए निगम अब केवल निर्धारित स्थानों पर ही डॉग फीडिंग व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की तैयारी में जुट गया है।

सोहना में कछुआ गति से चल रहा कुत्तों की नसबंदी अभियान

सोहना नगर परिषद क्षेत्र में आवारा कुत्तों की नसबंदी का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। करीब तीन महीने पहले सभी 21 वार्डों में शुरू किया गया यह अभियान अब तक धरातल पर बेअसर दिखाई दे रहा है। शहर सहित आसपास के गांवों जैसे धुनेला, बेरका, खाईका, बालूदा और लाखूवास में आवारा कुत्तों का भारी आतंक है। आए दिन ये कुत्ते बाइक और स्कूटी सवारों पर झपट रहे हैं, जिससे लोग अपना संतुलन खोकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं। बालूदा निवासी राजेंद्र और भगत सिंह ने बताया कि रात में कुत्तों के डर से निकलना मुश्किल हो गया है और ये बच्चों के हाथ से खाने का सामान तक छीन लेते हैं। वार्ड-6 के निवासी विकास सहित अन्य लोगों ने मांग की है कि नसबंदी अभियान को ग्रामीण इलाकों के बजाय पहले मुख्य शहरी क्षेत्रों में तेजी से चलाया जाए। दूसरी ओर, नगर परिषद के अधिकारियों और संबंधित एजेंसी का दावा है कि अब तक क्षेत्र में 300 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। सोहना नगर परिषद के सफाई निरीक्षक हरीश मेहता ने बताया कि कुत्तों की नसबंदी का कार्य एक एजेंसी और धार्मिक संस्था से जुड़ी महिला मिलकर संयुक्त रूप से कर रहे हैं।

कुत्ता प्रेमियों और पीड़ितों में छिड़ी बहस

सुप्रीम कोर्ट के इस नए आदेश के बाद शहर में कुत्ता प्रेमियों (एनिमल लवर्स) और पीड़ित पक्ष के लोगों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। पशु प्रेमी वैशाली राणा ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब नगर निगम के पास पहले से ही पकड़े गए कुत्तों को रखने के लिए कोई पर्याप्त शेल्टर होम या सुरक्षित जगह ही नहीं है, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों को पकड़कर कहां रखा जाएगा? उन्होंने डर जताया है कि जगह की कमी के कारण बेजुबान जानवरों के साथ क्रूरता हो सकती है और नियमों का दुरुपयोग करके शांत कुत्तों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

दूसरी ओर, आवारा कुत्तों के हमले से पीड़ित हुए लोगों ने कोर्ट के इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। सेक्टर-23 निवासी विक्रम सिंह का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से आम जनता के हित में है। आए दिन मासूम बच्चों और बुजुर्गों पर होने वाले कुत्तों के जानलेवा हमलों के कारण लोग पार्कों और सड़कों पर निकलने से डरने लगे थे। इंसानी जान की कीमत किसी भी जानवर से बढ़कर है, इसलिए सार्वजनिक जगहों को पूरी तरह सुरक्षित और कुत्ता-मुक्त किया जाना बेहद जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार निगम की तरफ से आगामी कार्रवाई की जाएगी। कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण काम तेजी किया जा रहा है।

- डॉ. आशीष सिंगला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नगर निगम, गुरुग्राम

सामान्य प्रश्न

गुरुग्राम में आवारा कुत्तों के खिलाफ कौन सा अभियान चलाया जा रहा है?
गुरुग्राम में निगम की तरफ से सार्वजनिक जगहों पर खतरनाक और पागल कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है।
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