
अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन जरूरी
संक्षेप: गुरुग्राम में राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि 21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन आवश्यक हो गया है। उन्होंने एक पुस्तक के विमोचन समारोह में बताया कि यह पुस्तक केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को सोचने और राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करने वाली है।
गुरुग्राम। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि 21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन जरूरी है। राज्यपाल मंगलवार को सिविल सेवा एवं राज्य सेवा परीक्षाओं के लिए पुस्तक के दूसरे संस्करण का विमोचन समारोह में संबोधित कर रहे थे। गुरुग्राम के साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध इंटरनेशनल रिलेशंस की ओर से सिविल सेवा एवं राज्य सेवा परीक्षाओं के लिए पुस्तक के दूसरे संस्करण का विमोचन किया गया। इसमें विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव रहे दामु रवि विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह पुस्तक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी हरियाणा के कुलपति प्रो. अशोक कुमार तथा गुरुग्राम डीसीपी ट्रैफिक डॉ. राजेश मोहन की ओर से लिखी गई है।

राज्यपाल ने कहा कि आज की दुनिया में कोई भी मुद्दा अलग-थलग नहीं है। चाहे वह जलवायु परिवर्तन हो, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा या सार्वजनिक स्वास्थ्य, हर विषय वैश्विक प्रभाव से जुड़ा हुआ है। राज्यपाल प्रो. घोष ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन विद्यार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण देता है और उन्हें संतुलित, तार्किक व उत्तरदायी नेतृत्व के लिए तैयार करता है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शक नहीं, बल्कि जीवन के लिए दृष्टिकोण देने वाली कृति है, जो युवाओं को विचारशीलता, विवेक और राष्ट्र सेवा के भाव से प्रेरित करेगी। यह पुस्तक एक प्रेरक और ज्ञानवर्धक है: प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि यह पुस्तक केवल जानकारी का संकलन नहीं है, बल्कि यह एक प्रेरक और ज्ञानवर्धक है। इसमें उन अनुभवी व्यक्तित्वों की संचित बुद्धिमत्ता निहित है जिन्होंने वर्षों तक प्रशासनिक और कूटनीतिक क्षेत्र में कार्य किया और अब अपने अनुभवों के माध्यम से नई पीढ़ी को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल शैक्षणिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि विचारों की दुनिया और व्यवहारिक जीवन के बीच सेतु का कार्य करेगी। बहुपक्षीय मंचों पर बढ़ते प्रभाव का विश्लेषण है: पुस्तक लेखक व स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी हरियाणा के कुलपति अशोक कुमार ने कहा कि यह पुस्तक भारत की विदेश नीति और बदलती वैश्विक राजनीति की गहराई से समझ प्रदान करती है। इसमें भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति, क्वाड में सहभागिता, कोविड संकट के दौरान मानवीय नेतृत्व तथा जी-20 और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर बढ़ते प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। पुस्तक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर समेत अन्य भारत के अग्रणी विचारकों के दृष्टिकोण को भी शामिल किया गया है। ताकि पाठक भारत के दृष्टिकोण को भारतीय कूटनीतिज्ञों और विद्वानों की नजर से समझ सकें। पुस्तक का यह संस्करण वैश्विक राजनीति: पुस्तक के सह लेखक डॉ राजेश मोहन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध अब केवल समझौतों और औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह एक सतत परिवर्तित होती प्रक्रिया बन चुकी है। आज की भू-राजनीति डिजिटल युग की तीव्र गति से प्रभावित है, जहां एक ट्वीट भी वैश्विक समीकरण बदल सकती है। पुस्तक का यह संस्करण वैश्विक राजनीति, भारत की विदेश नीति, जलवायु कूटनीति और डिजिटल सुरक्षा जैसे समकालीन विषयों को समाहित करता है, जो छात्रों, सिविल सेवा अभ्यर्थियों और नीति निर्माताओं के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगा। समारोह में ये रहे मौजूद: इस मौके पर राज्यपाल की धर्मपत्नी मित्रा घोष, हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान के महानिदेशक मनोज यादव, साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय की एकेडमिक प्रोवोस्ट प्रोफ़ेसर एलायस फिलिप्स, गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ संजय कौशिक, मैकग्रा हिल एजुकेशन के प्रोडक्ट डायरेक्टर तनवीर अहमद, एसडीएम बादशाहपुर संजीव सिंगला, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, विद्यार्थी समेत अन्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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