उद्योगों को बड़ी राहत, खुद कूड़ा निस्तारण करने पर नहीं लगेगा शुल्क
- परिसर में ही कचरा निपटाने वालों को मिलेगी छूट, नई व्यवस्था से फैलेगा स्वच्छता का संदेश

गुरुग्राम, वरिष्ठ संवाददाता। उद्योगों और फैक्ट्रियों के लिए सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। अब जो उद्योग अपने कूड़े का निस्तारण अपने स्तर पर और अपने ही परिसर में करेंगे, उनसे नगर निगम कोई कूड़ा शुल्क नहीं वसूलेगा। इस फैसले का उद्देश्य औद्योगिक कचरे को बाहर फैलने से रोकना और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना है। अब तक उद्योगों से 0.50 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से कूड़ा निस्तारण शुल्क वसूला जाता था। साथ ही, शुल्क की गणना पूरे प्लॉट या जमीन के क्षेत्रफल के आधार पर की जाती थी। नई व्यवस्था के तहत यह नियम बदला जाएगा और केवल कवर्ड एरिया (निर्मित क्षेत्र) के आधार पर शुल्क लिया जाएगा।
इसको लेकर मुख्यमंत्री ने सोमवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में की है। बता दें कि शहर में सैंकड़ों की संख्या में उद्योग और बड़ी फैक्ट्रियां मौजूद हैं, जिनसे रोजाना करीब 400 टन से अधिक कूड़ा निकलता है। अगर सभी उद्योग अपने स्तर पर कूड़े का निस्तारण शुरू कर देंगे तो शहर में लैंडफील साइट बंधवाड़ी में कूड़े का बोझ कम हो सकेगा। खुद निस्तारण करने वालों को पूरी छूट सरकार की नई घोषणा के अनुसार, जो फैक्ट्री या उद्योग अपने परिसर में ही कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करेगा, उसे किसी प्रकार का कूड़ा शुल्क नहीं देना होगा। इसके लिए उद्योगों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कचरा बाहर न जाए और पर्यावरण मानकों का पालन किया जाए। वहीं, जो उद्योग अपने स्तर पर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं करेंगे, उन्हें अपने कवर्ड एरिया के अनुसार शुल्क देना होगा। पहले यह शुल्क पूरे प्लॉट के हिसाब से लिया जाता था, जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। स्वच्छता संरक्षण को बढ़ावा सरकार का मानना है कि इस फैसले से उद्योग अपने यहां कूड़ा निस्तारण की बेहतर व्यवस्था विकसित करेंगे। इससे औद्योगिक कचरा खुले में नहीं फैलेगा और शहर की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार होगा। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, नई नीति लागू होने के बाद निरीक्षण प्रक्रिया भी सख्त की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जो उद्योग शुल्क छूट का लाभ ले रहे हैं, वह वास्तव में अपने परिसर में कूड़े का सही निस्तारण कर रहे हैं। उद्योग संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।
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