Gurgaon News: द्रोणाचार्य कॉलेज में फिजिकल काउंसलिंग के लिए उमड़ी भीड़
Gurgaon News: - पहली फिजिकल काउंसलिंग में सुबह से कॉलेज पहुंचे विद्यार्थी, पसंदीदा विषय और सीट के लिए लंबी कतारें

Gurgaon News: गुरुग्राम, साक्षी रावत। कॉलेजों में स्नातक दाखिलों की दौड़ अब मेरिट सूची से आगे बढ़कर फिजिकल काउंसलिंग तक पहुंच गई है। इसी क्रम में द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय, गुरुग्राम में पहली फिजिकल काउंसलिंग के दौरान विद्यार्थियों की अच्छी-खासी भीड़ रही। रविवार सुबह से ही विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ कॉलेज पहुंचने लगे। किसी की नजर पसंदीदा कोर्स में सीट मिलने पर थी तो कोई पहली ऑनलाइन प्रक्रिया में मौका नहीं मिलने के बाद फिजिकल काउंसलिंग को आखिरी अवसर के तौर पर देख रहा था।
कॉलेज में व्यवस्था
कॉलेज में पहुंचने वाले विद्यार्थियों के दस्तावेजों की जांच, सीटों की उपलब्धता और दाखिले से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा कराने के लिए अलग-अलग स्तर पर व्यवस्था की गई। विद्यार्थियों को प्रक्रिया समझाने और ऑनलाइन से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए कंप्यूटर विभाग और कंप्यूटर सेल की टीम भी सक्रिय रही। इससे छात्रों को आवेदन, दस्तावेज और फीस से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने में मदद मिली।
फिजिकल काउंसलिंग का महत्व
यूजी दाखिलों में पहली और दूसरी मेरिट सूची के बाद अब कॉलेजों में खाली बची सीटों को भरने के लिए फिजिकल काउंसलिंग का सहारा लिया जा रहा है। पहली मेरिट में कई विद्यार्थियों ने फीस जमा नहीं की, जबकि कुछ ने दूसरे कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया। इसका असर सीटों पर पड़ा और अब खाली सीटों को भरने के लिए फिजिकल काउंसलिंग महत्वपूर्ण हो गई है।
दूसरी मेरिट के बाद कई कॉलेजों में सीटें भर चुकी हैं, लेकिन कुछ विषयों और कॉलेजों में अभी भी सीटें खाली हैं। ऐसे में जिन विद्यार्थियों को अब तक मनचाहा कॉलेज या विषय नहीं मिल पाया है, उनके लिए फिजिकल काउंसलिंग महत्वपूर्ण मौका बन गई है। द्रोणाचार्य कॉलेज में भी इसी उम्मीद के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी पहुंचे।
काउंसलिंग के दौरान सुविधाएं
काउंसलिंग के दौरान विद्यार्थियों और अभिभावकों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बाहर न जाना पड़े, इसके लिए कॉलेज परिसर में स्टेपलर, पिन, टैग और फोटोकॉपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। कंप्यूटर विभाग की टीम ने विद्यार्थियों की ऑनलाइन प्रक्रिया से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में मदद की। कॉलेज के कंप्यूटर प्रकोष्ठ अधिकारी डॉ. सोनिका और डॉ. अलका के साथ संबंधित नोडल अधिकारियों और महिला शिक्षिकाओं ने काउंसलिंग व्यवस्था के संचालन में भूमिका निभाई। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि कोशिश यही रही कि विद्यार्थियों को एक ही परिसर में अधिक से अधिक सुविधाएं मिलें और उन्हें प्रक्रिया को लेकर इधर-उधर न भटकना पड़े।
विद्यार्थियों की भागीदारी
डॉ. सुनील डबास ने बताया को पहली फिजिकल काउंसलिंग में विद्यार्थियों और अभिभावकों की अच्छी भागीदारी रही। कॉलेज की ओर से प्रयास किया गया कि विद्यार्थियों को काउंसलिंग के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो और कंप्यूटर से जुड़ी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जा सके। फिजिकल काउंसलिंग का सबसे बड़ा फायदा उन विद्यार्थियों को मिल सकता है, जिन्हें मेरिट प्रक्रिया में अपनी पसंद का कॉलेज या विषय नहीं मिल पाया। खासकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थी अब उपलब्ध सीटों की जानकारी लेकर कॉलेजों में पहुंच रहे हैं। शहर के प्रमुख सरकारी कॉलेजों में सीटों की उपलब्धता लगातार बदल रही है, ऐसे में विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग के दौरान मौके पर स्थिति जानना ज्यादा आसान हो रहा है।


