Gurgaon News: संस्था एक ही दफ्तर से 44.70 लाख का गबन: पूर्व कर्मचारी मामला दर्ज
Gurgaon News: गुरुग्राम में विमर्श प्रकाशन फाउंडेशन और विचार विनिमय न्यास ट्रस्ट में 44.70 लाख रुपये का गबन हुआ है। पूर्व कर्मचारी अंकित गुप्ता पर आरोप है कि उसने चेक चुराकर अपने और परिवार के खातों में पैसे ट्रांसफर किए। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है।

Gurgaon News: गुरुग्राम,प्रमुख संवाददाता। न्यू माता रोड स्थित एक ही कार्यालय परिसर में संचालित दो प्रसिद्ध संस्था विमर्श प्रकाशन फाउंडेशन और विचार विनिमय न्यास ट्रस्ट में 44.70 लाख रुपये का गबन हुआ। दोनों संस्थाओं में वित्तीय कामकाज देखने वाले पूर्व कर्मचारी पर यह रुपये अपने और अपने सगे-संबंधियों के खातों में ट्रांसफर करने का आरोप है। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर सेक्टर-14 थाना पुलिस ने आरोपी और उसके सहयोगियों के खिलाफ दो अलग-अलग आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फाउंडेशन की शिकायत
फाउंडेशन के निदेशक विकास कपूर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि दिल्ली के तिहाड़ गांव निवासी अंकित गुप्ता फरवरी 2022 से संस्थान में वित्तीय लेनदेन संभाल रहा था। फाउंडेशन के पीएनबी बैंक खाते से दैनिक खर्चों के लिए अधिकृत अधिकारियों के पूर्व-हस्ताक्षरित चेक दफ्तर में रखे रहते थे।
धोखाधड़ी के आरोप
मई 2026 में अंकित के बिना बताए नौकरी छोड़ने पर जब बैंक स्टेटमेंट निकलवाई गई, तो भारी अनियमितता मिली। अंकित ने 13 जून 2022 से चार अप्रैल 2026 के बीच चेक चुराकर 20 लाख चार हजार रुपये खुद तथा अपने परिजनों व परिचितों मनीष वर्मा, राजेश, श्वेता, ज्योति और विनोद साही के खातों में ट्रांसफर कर लिए थे।
ट्रस्ट का कामकाज
इसी परिसर में कार्यरत ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष चिदंबर शर्मा के अनुसार अंकित ही ट्रस्ट के बैंक खातों का कामकाज देखता था। ट्रस्ट के खर्चों के लिए चेक के साथ दिए जाने वाले लेटरहेड को हस्ताक्षर के बाद अंकित हटा देता था। इसके बाद वह चेक के पीछे अपने और करीबियों के खाते लिखकर रकम निकाल लेता था।अंकित ने 10 नवंबर 2022 से 9 फरवरी 2026 के बीच धोखाधड़ी से 24 लाख 66 हजार 656 रुपये संतोष, राजेश, श्वेता, देशराज और मनीष वर्मा के खातों में ट्रांसफर किए।
जालसाजी का खुलासा
वर्षों तक जालसाजी का पता नहीं चला
जांच में सामने आया कि आरोपी अंकित बैंक से सीधे अपनी ईमेल आईडी पर पीडीएफ स्टेटमेंट मंगाता था। इसके बाद वह एक्सेल शीट पर गबन की गई एंट्रियों को डिलीट कर देता था। यही संपादित की हुई फर्जी बैंक स्टेटमेंट वह ट्रस्टियों और सीए को देता रहा, जिससे वर्षों तक इस जालसाजी का पता नहीं चला। दोनों शिकायतों की गहन तस्दीक के बाद पुलिस आयुक्त के आदेश पर थाना सेक्टर-14 में एएसआई रामचंद्र की मौजूदगी में मामले दर्ज किए गए। पुलिस की टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी और गबन की गई राशि की रिकवरी के लिए छापेमारी कर रही हैं。


