ऋण लेकर 185 महिलाएं उद्यमी बन 500 को स्वरोजगार से जोड़ा

Mar 08, 2026 06:29 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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महिला दिवस : -पांच बैंकें स्वयं सहायता समूहों की 500 खाता खोलकर तीन करोड़ दिया -बैंकों में 251 महिलाएं आवेदन करके 7.40 करोड़ रुपये का मांगा था ऋण -महि

ऋण लेकर 185 महिलाएं उद्यमी बन 500 को स्वरोजगार से जोड़ा

गुरुग्राम। जिले की पांच बैंके महिला सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभाई रही हैं। जिले की 185 महिलाएं बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण कारोबार शुरू किया। 500 अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ा है। महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। इसका खुलासा जिला अग्रणी कार्यालय को बैंकों की रिपोर्ट में हुआ है। इसमें महिलाओं के खाता खोलकर तीन करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है। जिला अग्रणी प्रबंधक विनोद कुमार बजाज ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ( एनआरएलएम) एक प्रमुख योजना है। जिसका लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से ग्रामीण गरीबों, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाकर परिवारों की गरीबी कम करना है।

महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, बैंक देकर आजीविका के अवसर दिया जाता है। पांच बैंकों की ओर आई रिपोर्ट में 251 महिलाएं आवेदन करके 7.40 करोड़ रुपये का ऋण मांगा था। इनके आवेदनों की जांच करके पांच बैकों में 185 महिलाओं के तीन करोड़ रुपये का लोन मंजूरी। इस ऋण से महिलाएं 2025-26 में उद्योग शुरू किया है। इसमें सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में 186 में से 156 आवेदन मंजूरी, 13 आवेदन लंबित है। केनरा बैंक में 25 में 18 आवेदन मंजूरी, 5 लंबित, पंजाब नेशनल बैंक में 9, पंजाब एंड सिंध बैंक में एक और एचएसडीएफ में 30 आवेदन मंजूर किए गए है।इन कामों में महिलाएं आत्मनिर्भर बनीएलडीएम ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं सिलाई, ब्यूटी पार्लर, कसीदाकारी जैसे काम शुरू करने के लिए बैंकों से ऋण दिया। वह आत्मनिर्भर बनकर 500 अतिरक्त महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा है। इससे होने वाली आय को बैंकों में जमा कराने के लिए 500 महिलाओं के खाते खाले गए हैं।महिलाएं अब अपने घर का भी खर्च उठा रहीं है:पटौदी की रुपाली ने कहा कि मेरी शादी होने के बाद अपनी पढ़ाई पूरी की। पति चाहते थे कि पढ़-लिखकर कुछ अच्छा काम करूं। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद हर्बल उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग लेकर काम शुरू किया। इसमें अपना रोजगार आगे बढ़ाने पर दूसरी महिलाएं भी जुड़ गई है। इस काम को सीखकर महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही है, बल्कि वे अपने घर का भी खर्च उठा रहीं है।घर से बाहर निकलने की आजादी मिली:वहीं सरला ने कहा कि स्वयं सहायता समूह से व्यवसाय शुरू करने के लिए दो लाख तक का ऋण मिला था। इन पैसों से अपना काम शुरू करके 26 अन्य महिलाओं को स्वरोजगार दिया गया। पहले हम लोग सिलाई का काम कर रहे थे। जिसमें हम लोग साबुन, हैंडवाश के साथ ही बहुत तरीके के साबुन बना रहे हैं। वह बताती हैं कि पहले तो हम लोग घर तक ही सीमित थे। अब बाहर निकलने का मौका मिला है। बच्चे बड़े हो गए हैं। ऐसे में बाहर निकलने के लिए थोड़ी सी आजादी मिल गई है।

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