टावर ऑफ जस्टिस का काम पूरा करने को लेकर पड़ोसी जिलों से बुलाए अधिकारी
गुरुग्राम जिला अदालत परिसर में हाल ही में लगी भीषण आग के बाद टावर ऑफ जस्टिस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने की मांग तेज हो गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग को प्रोजेक्ट 15 जून 2026 तक पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं। निर्माण कार्य में देरी के कारण लागत बढ़कर 295 करोड़ रुपये हो गई है।

गुरुग्राम,गौरव चौधरी। जिला अदालत परिसर में हाल ही में लगी भीषण आग के बाद लंबे समय से लटके टावर ऑफ जस्टिस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। इस आग के कारण अदालती कामकाज पूरी तरह ठप हो गया था, जिसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्य की रफ्तार बढ़ाने के लिए पड़ोसी जिलों से अतिरिक्त इंजीनियर और कर्मचारियों को काम पर लगाया है।
हाईकोर्ट के निर्देश
हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग को 15 जून 2026 तक हर हाल में प्रोजेक्ट पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं और साफ कहा है कि अब किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि भविष्य में इस तरह के हादसों और व्यवधानों से बचने के लिए इस अत्याधुनिक परिसर का समय पर तैयार होना बेहद जरूरी है।
प्रोजेक्ट का इतिहास
3 साल का प्रोजेक्ट, 9 साल बाद भी अधूरा सात एकड़ में फैले इस भव्य और आधुनिक न्यायिक परिसर की आधारशिला साल 2014 में रखी गई थी, लेकिन कृषि विभाग की जमीन ट्रांसफर होने के विवाद के कारण काम शुरू होने में देरी हुई। जनवरी 2017 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और इसे 2020 से तीन साल तक पूरा किया जाना था। नौ साल बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट अधूरा है। देरी के कारण इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 113 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 295 करोड़ रुपये हो चुकी है।
सरकार की चेतावनी
इससे पहले अप्रैल में हाईकोर्ट ने इस लेटी-लतीफी को प्रशासनिक अक्षमता बताते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था और 15 मई तक की डेडलाइन दी थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि काम पूरा न होने पर मुख्य सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बाद में सरकार के अनुरोध पर अदालत ने इसे एक महीने के लिए बढ़ाकर 15 जून कर दिया था।
न्यायपालिका की अपेक्षा
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, न्यायपालिका चाहती है कि 15 जून तक काम पूरा हो जाए, ताकि गर्मियों की छुट्टियों के बाद अदालतों को नए परिसर में शिफ्ट किया जा सके।
मंगलवार को निर्माणाधीन साइट का दौरा किया, तो अगले कुछ महीनों में अदालतों को पूरी तरह शिफ्ट करना काफी मुश्किल नजर आ रहा है। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सिविल वर्क (ढांचागत काम) भले ही पूरा हो जाए, लेकिन अदालतों के संचालन के लिए बिल्डिंग को पूरी तरह तैयार करने में अभी कुछ महीनों का समय और लग सकता है।
नए टावर ऑफ जस्टिस की विशेषताएं
कैसा होगा नया टावर ऑफ जस्टिस इस हाई-टेक कॉम्प्लेक्स में दो ब्लॉक होंगे। एक ब्लॉक आठ मंजिला और दूसरा सात मंजिला बनाया गया है। जिसमें 55 जिला और सत्र अदालतें चल सकेंगी। वर्तमान में गुरुग्राम में 45 अदालतें हैं, जिन पर करीब 65 हजार लंबित मामलों का बोझ है।
नए परिसर की मुख्य विशेषताएं: पहली मंजिल पर एक विशाल लाइब्रेरी और 1,500 वकीलों के बैठने की क्षमता वाला बार रूम होगा। शहर में पहली बार महिला अधिवक्ताओं के लिए एक अलग बार रूम बनाया जा रहा है। कोर्ट में पेशी के लिए आने वाले आरोपियों/कैदियों के लिए अलग एंट्री गेट और अलग लिफ्ट की व्यवस्था होगी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। ग्राउंड फ्लोर पर कानूनी सेवाओं के लिए सिंगल-विंडो केयर सेंटर और सेंट्रलाइज्ड शिकायत फाइलिंग सिस्टम होगा। परिसर में मल्टी-लेवल पार्किंग, 20 मध्यस्थता केंद्र, बैंक और पोस्ट ऑफिस जैसी सुविधाएं भी मौजूद रहेंगी।
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


