
चिंता: प्रदूषण और वायरस के बीच पानी की कमी से धीमी पड़ रही रिकवरी
- सर्दियों में भी बढ़ रहा डिहाइड्रेशन का खतरा चिंता: प्रदूषण और वायरस के बीच पानी की कमी से धीमी पड़ रही रिकवरी चिंता: प्रदूषण और वायरस के बीच पानी क
गुरुग्राम,संवाददाता। सर्दियों के मौसम में प्यास कम लगने की आदत अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। प्रदूषण और वायरल संक्रमण के इस दौर में शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन के मामले सामने आ रहे हैं। इसका सीधा असर मरीजों की रिकवरी पर पड़ रहा है और बीमारी से उबरने में पहले के मुकाबले ज्यादा समय लग रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, ठंड के मौसम में पसीना कम आने की वजह से लोग यह मान लेते हैं कि शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। प्रदूषण के कारण शरीर में जहरीले कण प्रवेश कर रहे हैं और वायरल संक्रमण के दौरान शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है।

ऐसे में पर्याप्त पानी न पीना समस्या को और गंभीर बना रहा है। सर्दियों में भी बढ़ रहा डिहाइड्रेशन का खतरा: सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में ओपीडी में आने वाले मरीजों में थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द और मुंह सूखने जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। जांच के बाद कई मामलों में डिहाइड्रेशन की पुष्टि हो रही है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, वायरल बुखार या सर्दी-खांसी के साथ आने वाले मरीजों में पानी की कमी तेजी से देखी जा रही है। ठंड में प्यास कम, लेकिन शरीर हो रहा डिहाइड्रेट: नागरिक अस्पताल की सीनियर फिजिशियन डॉ. काजल कुमुद का कहना है कि सर्दियों में प्यास कम लगना स्वाभाविक है, लेकिन इससे शरीर की पानी की जरूरत कम नहीं हो जाती। प्रदूषण और वायरल संक्रमण के दौरान शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत होती है। पानी कम पीने से थकान बढ़ती है और बीमारी से उबरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। कई मरीज ऐसे आ रहे हैं जिनकी कमजोरी की मुख्य वजह डिहाइड्रेशन है। पानी की कमी से बीमारी से उबरने में लग रहा ज्यादा समय: डॉक्टरों के अनुसार, पानी की कमी से दवाओं का असर भी पूरी तरह नहीं हो पाता। इससे मरीजों को लंबे समय तक कमजोरी बनी रहती है और संक्रमण जल्दी ठीक नहीं होता। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों में इसका असर ज्यादा देखा जा रहा है। लोगों को सलाह दी है कि सर्दियों में भी नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। गुनगुना पानी, सूप, फल और तरल आहार को दिनचर्या में शामिल करें। प्यास लगने का इंतजार न करें और वायरल या बुखार की स्थिति में पानी की मात्रा और बढ़ा दें। इन बातों पर ध्यान देने की जरूरत: सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को पानी की जरूरत कम नहीं होती - प्रदूषण और वायरल संक्रमण के दौरान पानी शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है - दिनभर में थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहें - गुनगुना पानी, सूप और तरल आहार को दिनचर्या में शामिल करें - बुखार, सर्दी-खांसी या कमजोरी की स्थिति में पानी की मात्रा बढ़ाएं - बुजुर्ग और बच्चों को पानी पीने के लिए याद दिलाते रहें सर्दियों में लोग अक्सर पानी की जगह चाय-कॉफी या गर्म पेय पर ज्यादा निर्भर हो जाते हैं, जिससे शरीर में पानी की वास्तविक जरूरत पूरी नहीं हो पाती। लंबे समय तक हल्का डिहाइड्रेशन रहने से मांसपेशियों में दर्द, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और नींद में बाधा जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। कई मरीज ऐसे हैं जिनमें जांच के बाद पता चलता है कि कमजोरी किसी गंभीर बीमारी की नहीं, बल्कि लगातार कम पानी पीने की वजह से है। अगर समय रहते पानी की मात्रा नहीं बढ़ाई गई तो यह समस्या धीरे-धीरे ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी दिक्कतों को भी प्रभावित कर सकती है। - डॉक्टर काजल कुमुद, फिजिशियन, जिला नागरिक अस्पताल सेक्टर 10

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