जालसाज को एक लाख रुपये में बैंक खाता मुहैया करवाने वाले दो गिरफ्तार
गुरुग्राम में ऑनलाइन निवेश के जरिए 17 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने जालसाज को एक लाख रुपये में एक बैंक खाता मुहैया कराया था। पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश करते हुए रिमांड पर लिया ताकि मुख्य सरगना तक पहुंचा जा सके।

गुरुग्राम, गौरव चौधरी। निवेश के नाम पर 17 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में जालसाजों को बैंक खाता मुहैया करवाने वाले दो आरोपियों को साइबर थाना पूर्व की टीम ने गिरफ्तार किया। आरोपियों ने जालसाज को एक लाख रुपये में एक बैंक खाता मुहैया करवाया था। साइबर अपराध पूर्व थाना प्रबंधक निरीक्षक अमित के नेतृत्व में गठित विशेष पुलिस टीम ने तकनीकी इनपुट के आधार पर छापेमारी करते हुए मंगलवार को जून 2026 को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोंटी निवासी गांव अकरवास बुलंदशहर, यूपी और मनीष कुमार मूल निवासी गांव निनामई हाथरस, यूपी के रूप में हुई है।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश कर एक दिन के पुलिस हिरासत रिमांड पर लिया है, ताकि गिरोह के मुख्य सरगना तक पहुंचा जा सके।
शिकायत का कारण
19 फरवरी 2026 को गुरुग्राम के एक निवासी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित को ऑनलाइन निवेश के जरिए घर बैठे मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया था, जिसके जाल में फंसकर पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में करीब 17 लाख ट्रांसफर कर दिए। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दी।
बैंक खाता की बिक्री
पुलिस पूछताछ और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच में सामने आया कि पीड़ित से ठगे गए 17 लाख में से सात लाख की राशि एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम पर खुले बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी। यह खाता आरोपी मोंटी और मनीष ने मिलकर खुलवाया था। आरोपियों ने साइबर ठगों से एक लाख का मोटा कमीशन लेकर यह खाता उन्हें सौंप दिया था।
खातों की संख्या
अब तक पांच बैंक खाते करवा चुके हैं उपलब्ध
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों ने कुबूल किया कि वे केवल एक खाते तक सीमित नहीं थे। उन्होंने इस फर्जीवाड़े को अपना धंधा बना लिया था। आरोपियों ने पूछताछ में माना कि वे अब तक विभिन्न शेल (फर्जी) कंपनियों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चार अन्य बैंक खाते भी खुलवा चुके हैं, जिन्हें उन्होंने साइबर ठगी को अंजाम देने वाले गैंग को ऊंचे दामों पर बेचा था。
मुख्य अपराधियों का पता लगाने की कोशिश
थाना प्रभारी निरीक्षक अमित ने बताया कि आरोपियों से रिमांड के दौरान उन मुख्य साइबर अपराधियों के मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप चैट और टेलीग्राम आईडी के सुराग जुटाए जा रहे हैं जो इन खातों को ऑपरेट कर रहे थे।
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