गेमिंग के नाम पर ठगने वाले दबोचे
गुरुग्राम में साइबर थाना पुलिस ने सिगनेचर ग्लोबल सोसाइटी के एक फ्लैट में छापेमारी कर ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाज़ी के बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो फेसबुक पर गेमिंग के झांसे में लोगों को फंसाकर ठगी कर रहे थे। पुलिस ने कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं।

गुरुग्राम,गौरव चौधरी। सेक्टर-37डी स्थित सिगनेचर ग्लोबल सोसाइटी के एक फ्लैट में साइबर थाना पुलिस ने छापेमारी कर ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाज़ी और वित्तीय धोखाधड़ी के बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फ्लैट से ऑनलाइन सट्टा पैनलों में से एक reddyanna888 के चार बुकीज को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। ये देशभर के लोगों से ठगी और अवैध सट्टे का कारोबार संचालित कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आदित्य निवासी गांव कारीधारिणी, जिला चरखी दादरी,कपिल निवासी गांव फैजलीपुर, जिला महेंद्रगढ़, सन्नी चाहर निवासी गांव गहरी खुर्द, ब्लॉक अकोला, जिला आगरा (उत्तर प्रदेश) और सूरज राजपूत निवासी शांति नगर, माल गोदाम रोड, मथुरा (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई। इन चारों के खिलाफ थाना साइबर दक्षिण में मामला दर्ज कर किया गया।
पुलिस की कार्रवाई
एसीपी साइबर गौरव फौगाट ने बताया कि तकनीकी सर्विलांस के जरिए सूचना मिली थी कि सिगनेचर ग्लोबल सोसाइटी के एक फ्लैट में कुछ युवक रह रहे हैं, जिनके पास भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं। वह आनलाइन गेमिंग खिलाकर लोगों के साथ ठगी कर रहे है। 28 मई रात को पुलिस की एक विशेष टीम ने सोसाइटी के टावर जे-16 की तीसरी मंजिल पर स्थित फ्लैट में छापेमारी की। दरवाजा खुलते ही पुलिस ने देखा कि फ्लैट के अंदर चार युवक लैपटॉप और मोबाइल फोन स्क्रीन पर लाइव सट्टेबाज़ी और पैसों के अवैध लेनदेन का हिसाब-किताब संभाल रहे थे।
इस तरह लोगों को झांसे में लेते थे
पूछताछ में आरोपियों से पता चला कि आरोपी आदित्य अपने साथियों के साथ मिलकर एक अन्य मास्टरमाइंड के इशारे पर काम कर रहा था। यह गिरोह ग्राहकों को फंसाने के लिए सोशल मीडिया पर ऑनलाइन गेम खेलने और रातों-रात अमीर बनने के लुभावने विज्ञापन चलाता था। जब कोई यूजर इनके झांसे में आकर गेम खेलने के लिए तैयार होता, तो उसे इस गेमिंग वेबसाइट पर ले जाकर एक पर्सनल आईडी और पासवर्ड अलॉट किया जाता था। वेबसाइट पर पैसे जमा करने के लिए कई डिजिटल क्यूआर कोड दिए गए थे। आरोपियों का मुख्य काम इन क्यूआर कोड्स के जरिए आने वाले पैसों को सत्यापन करना और सट्टेबाज़ों की आईडी में वर्चुअल पॉइंट्स या काइंस जोड़ना था। इस काम के बदले इन चारों को कुल टर्नओवर में से 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था.
जांच में सामने आया कि
जांच में सामने आया कि इस गिरोह के तार एक बेहद संगठित साइबर सिंडिकेट से जुड़े हैं। पकड़े गए चारों आरोपियों को खुद सिम कार्ड या बैंक खाते का इंतजाम नहीं करना पड़ता था। व्हाट्सऐप के ज़रिए एक अज्ञात शख्स इन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों से खरीदे गए फर्जी बैंक खातों की किट, एक्टिवेटेड सिम कार्ड और डिजिटल पेमेंट के लिए नए-नए क्यूआर कोड सप्लाई करता था। इन फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और सट्टे के रुपयों को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।
जांच एजेंसी ने जब्त किया डिजिटल जखीरा
पुलिस ने आरोपियों के पास से स्मार्टफोन 15,दो लैपटॉप,15 एटीएम कार्ड,12 सक्रिय सिम कार्ड,11 बैंक की पासबुक व चेकबुक,सात रुपये ट्रांसफर होते ही वॉयस अलर्ट पाने वाला उपकरण,एक वाई-फाई राउटर बरामद किया गया है।
पकड़े गए चारों आरोपियों से रिमांड के दौरान गहनता से पूछताछ की जा रही है। पुलिस की एक विंग इनके द्वारा इस्तेमाल किए गए 11 बैंक खातों के स्टेटमेंट्स खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने रुपयों का ट्रांजैक्शन हो चुका है। पुलिस अब उस मुख्य आरोपी की तलाश में जुटी है जो इन्हें व्हाट्सऐप के जरिए लॉजिस्टिक्स और बैंक किट्स मुहैया करा रहा था।
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