व्यावसायिक सिलेंडरो की आपूर्ति न होने से छोटे उद्योगों पर संकट बढ़ा

Newswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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गुरुग्राम में व्यावसायिक सिलेंडरों की कमी से उद्योगों में संकट गहरा गया है। 250 से अधिक एमएसएमई इकाइयां प्रभावित हैं, जिससे उत्पादन ठप हो गया है। महंगी गैस के कारण लागत बढ़ रही है और नए ऑर्डर मिलना बंद हो गए हैं। उद्यमियों का कहना है कि स्थिति चिंताजनक है और अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

व्यावसायिक सिलेंडरो की आपूर्ति न होने से छोटे उद्योगों पर संकट बढ़ा

गुरुग्राम, कार्यालय संवाददाता। व्यावसायिक सिलेंडरो की आपूर्ति न होने से उद्योग गहरे संकट में पहुंच गए है। व्यावसायिक सिलेंडरो की किल्लत के चलते उद्योगों में हीट ट्रीटमेंट भट्टियां ठंडी पड़ गई हैं, जिससे उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस संकट का सबसे अधिक असर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) सेक्टर पर पड़ा है। जहां 250 से अधिक इकाइयां प्रभावित बताई जा रही हैं। इसमें औद्योगिक इकाइयों में रक्षा, आटोमोबाइल, सोलर और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए स्टील फास्टनर्स तैयार करती हैं। ओवरटाइम पूरी तरह बंद कर दिया:कादीपुर, बसई दौलताबाद औद्योगिक में 50 से 60 स्टील नट-बोल्ट निर्माण इकाइयों में काम लगभग ठप हो गया है।

पहले जहां 8 से 10 घंटे की नियमित शिफ्ट में उत्पादन होता था,अब कई इकाइयों में केवल एक शिफ्ट में ही काम चल रहा है। ओवरटाइम पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि कुछ फैक्ट्रियां अस्थायी रूप से बंद भी हो चुकी हैं। क्योंकि बाजार में व्यावसायिक सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। इन क्षेत्रों में पीएनजी सप्लाई के लिए पाइप लाइन नहीं बिछी है।गैस महंगी होने से उत्पादों के रेट बढ़:हीट ट्रीटमेंट प्रक्रिया इन उत्पादों की गुणवत्ता के लिए अनिवार्य होती है, जो पूरी तरह गैस पर निर्भर है। गैस की आपूर्ति रुकने से उत्पादन प्रक्रिया बाधित हो गई है, जिससे तैयार माल अधूरा रह गया और मशीनरी बेकार पड़ी है। कादीपुर के उद्यमी कश्मीर सिंह ने कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत के कारण उन्हें बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो रहा है। गैस महंगी होने से उत्पादों के रेट बढ़ गए हैं, जिसके चलते नट, बोल्ट, फास्टनर्स के नए ऑर्डर मिलना बंद हो गए हैं। पहले जो ऑर्डर स्थानीय इकाईयों को मिलते थे, अब वे अन्य राज्यों की कंपनियों को जा रहे हैं। इससे उद्योगों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।व्यावसायिक सिलेंडर न मिलने से काम ठप हो गया:कादीपुर के उद्यमी बंटी ने कहा कि इतनी महंगी गैस के बावजूद लागत की भरपाई संभव नहीं हो पा रही है। व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति एकदम रोक दी गई है। हमे नट बोल्ट बनाने में हर माह 25 से 30 व्यावसायिक सिलेंडर हर महीने खर्च होते थे। अब एक भी सिलेंडर नहीं मिलने से काम आधे से कम हो गया है। 20 कर्मियों की संख्या भी आधी हो गई है।उत्पादन लागत की भरपाई संभव नहीं:बसई के उद्यमी संजीव कुमार ने कहा कि व्यावसायिक सिलेंडरों की कमी से संकट का सबसे अधिक असर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग सेक्टर पर है। हमारे क्षेत्र में छोटे-छोटे उद्योग में रक्षा, आटोमोबाइल, सोलर, स्टील फास्टनर्स शामिल हैं। महंगी गैस के बावजूद उत्पादन लागत की भरपाई संभव नहीं हो पा रही है।व्यावसायिक सिलेंडरों की सप्लाई कम आ रही है। उद्योगों को न देकर जरुरत वाले संस्थानों को दिया जाता है। अब व्यावसायिक सिलेंडरों का कोटा बढ़ा दिया गया है। सिलेंडरों के आते ही उद्योगों को दिए जाएंगे।- अशोक कुमार रावत, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक गुरुग्राम

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