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गुड़गांव

प्लास्टिक की बोतल के बदले कूपन और थैले देने वाली मशीन शोपीस बनी

हिन्दुस्तान टीम,गुड़गांवPublished By: Newswrap
Wed, 10 Mar 2021 03:00 AM
प्लास्टिक की बोतल के बदले कूपन और थैले देने वाली मशीन शोपीस बनी

गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी से एकल उपयोग प्लास्टिक को खत्म करने के लिए साल 2019 में दो स्थानों पर लगाई गई रिबोट मशीनें केवल शोपीस बनकर रह गई हैं। इन मशीनों में प्लास्टिक की बोतलें डालने वालों को वापसी में रिचार्ज कूपन और जूट से बने थैले मिलने थे, लेकिन उद्घाटन के बाद से बीते डेढ सालों में इनका उपयोग नहीं हो पाया है। रिलायंस कंपनी की ओर से नगर निगम को यह मशीनें डोनेट की गई थी। नगर निगम की ओर से लगवाई गई यह मशीनें अब धूल फांक रही हैं। इनके जरिये एकल उपयोग प्लास्टिक को खत्म करने की योजना पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। पेश है रिपोर्ट...

मशीन के बारे में लोगों को नहीं जानकारी

स्थान: पुराना नगर निगम कार्यालय

सदर बाजार के पास स्थित पुराने नगर निगम कार्यालय में सबसे पहली रिबोट मशीन लगी थी। इसका उद्घाटन तत्कालीन निगमायुक्त अमित खत्री ने 18 सितंबर 2019 को किया था। मंगलवार को यह मशीन बंद मिली। आस-पास पता करने पर मालूम हुआ कि कुछ दिनों के लिए यह मशीन जरूर चली थी, लेकिन उसके बाद यह भी बंद हो गई। मशीन अब कबाड़ रखने के काम आ रही है। बेकार समान को निगम कर्मचारियों ने इस मशीन के ऊपर रख दिया है। यह मशीन निगम कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के पास रखी हुई है। बावजूद निगम कार्यालय में आने वाले लोगों को इसकी जानकारी नहीं है कि मशीन किस उपयोग से लगी है। नगर निगम शहर से एकल उपयोग प्लास्टिक को खत्म करने के लिए आए दिन तरह-तरह के जागरूकता अभियान चलता रहता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि खुद के कार्यालय में एकल उपयोग प्लास्टिक को खत्म करने के लिए लगवाई गई मशीन को बीते डेढ़ सालों में अधिकारी चालू नहीं करवा पाए हैं।

मशीन में भरा पड़ा है कचरा

स्थान: रेलवे स्टेशन

गुरुग्राम रेवले स्टेशन पर नगर निगम की ओर से ऐसी दो मशीनें लगवाई गई थी। एक मशीन प्लेट फार्म नंबर-1 पर व दूसरी मशीन प्लेटफार्म नंबर-2 पर लगवाई गई थी। इन दोनों मशीनों का उद्घाटन साल 2019 में गांधी जयंती के मौके पर किया गया था। मंगलवार को दोनों मशीनें बंद पड़ी मिली। इन मशीनों में कचरा भरा पड़ा है। जिसकी सफाई थी अभी तक नहीं की गई है। मशीन के पास में ही कूड़ेदान रखा हुआ था। जो पूरी तरह भारा हुआ था। उसमें जगह न होने के कारण यात्री प्लास्टिक की बोतलें और चाय के कप मशीन में ही फंसा कर गए हुए थे। स्टेशन पर मौजूदा कर्मचारियों ने बताया कि यह मशीनें केवल उसी दिन चली थी, जिस दिन इनका उद्घाटन हुआ था। उसके बाद से बीते डेढ़ सालों में उन्होंने कभी इन मशीनों को चलता नहीं देखा। रेलवे स्टेशन में इन मशीनों को लगवाने का उद्देश्य यह था, कि रेल में जो यात्री सफर करते हैं, वह पानी पीने के लिए दुकानों से बोतल खरीदते हैं। उपयोग के बाद उन बोतलों को या तो यात्री कूड़ेदान में या ट्रेन में ही छोड़ देते हैं। जो यहां-वहां सड़ती रहती है। यात्रियों को इन बोतलों के बदले रिचार्ज कूपन और जूट के थैले देने के लिए दो मशीनें स्टेशन पर लगवाई थी। दोनों ही बंद पड़ी हैँ।

नंबर गेम:

-03 मशीनें नगर निगम कार्यालय और रेलवे स्टेशन पर एकल उपयोग प्लास्टिक को खत्म करने के लिए लगवाई गई थी

-01.5 साल से तीनों मशीनें बंद पड़ी हैं। इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

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