निगम के कम्प्यूटर ऑपरेटर खुद की कंपनी बनाकर कर रहे टेंडरों में आवेदन
गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। नगर निगम की इंजीनियरिंग विंग में टेंडर आंवटन के दौरान भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। कंप्यूटर ऑपरेटरों ने सरकारी टेंडरों में गड़बड़ी करते हुए करोड़ों रुपये के टेंडर हथियाए हैं। ठेकेदारों ने निगम के अधिकारियों पर चहेतों को टेंडर बेचने का आरोप लगाया है।

गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। नगर निगम की इंजीनियरिंग विंग में टेंडर आंवटन में भारी गड़बड़ी की जा रही है। निगम के कंप्यूटर ऑपरेटरों पर खुद की कंपनियां बनाकर सरकारी टेंडरों में आवेदन करने और अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर करोड़ों रुपये के टेंडर हथियाने के गंभीर आरोप लगे हैं। निगम के पंजीकृत ठेकेदारों द्वारा उच्चाधिकारियों को दी गई एक लिखित शिकायत में इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर तकनीकी विंग के अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी कर रहे हैं, जिससे ईमानदार ठेकेदारों को काम नहीं मिल पा रहा है।
अधिकारियों पर चहेतों को टेंडर बेचने का आरोप
नगर निगम के ठेकेदार संदीप राठी ने सीधे तौर पर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के भीतर टेंडर बेचने का एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। अधिकारी इन कंप्यूटर ऑपरेटरों की तकनीकी मदद से नियमों को इस तरह मरोड़ते हैं कि टेंडर केवल उनके चहेतों और अपनों को ही आवंटित हो सके। इस खेल के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और विकास कार्यों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
दस साल से एक ही विंग में जमे कर्मचारियों का दबदबा
ठेकेदारों का कहना है कि एचकेआरएन के तहत लगे ये कर्मचारी सालों से एक ही सीट पर जमे हुए हैं। इंजीनियरिंग और तकनीकी शाखाओं में इनकी गहरी पैठ हो चुकी है। टेंडर की गोपनीयता और नियमों को ताक पर रखकर यह ऑपरेटर पहले ही तय कर लेते हैं कि किस कंपनी को बाहर करना है और किसे अंदर लेना है। अन्य कंपनियों के जरूरी दस्तावेजों को सिस्टम से गायब या अमान्य कर देना इनके लिए बेहद आसान हो गया है। निगम आयुक्त ने संपत्तिकर सहित अन्य शाखाओं के क्लर्कों को तो बदल दिया है,लेकिन इंजीनियरिंग विंग में सालों से बैठे इन क्लर्कों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
जांच और कड़ी कार्रवाई की उठ रही मांग
इस खुलासे के बाद नगर निगम के ठेकेदारों में भारी रोष व्याप्त है। ठेकेदार संदीप राठी सहित अन्य प्रभावितों ने सरकार और निगम के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। टेंडर खोलने वाले सभी डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित ऑपरेटर की पारिवारिक कंपनियों के बैंक खातों की जांच होनी चाहिए। वहीं कम्प्यूटर ऑपरेटर सोमबीर ने कहा कि उनके ऊपर लगे आरोप झूठे और बेबिनुयाद है। ठेकेदार द्वारा काम नहीं करने के कारण उसके कई टेंडर रद्द हो चुके हैं। इस कारण वह उस पर बिना किसी आधार के झूठा आरोप लगाकर शिकायत कर रहा है।
ठेकेदार द्वारा दी गई शिकायत की जांच करवाई जाएगी। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम
मामले के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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