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कॉलेज की मेस और कैंटीन के टेंडर में गड़बड़झाला

गुरुग्राम। वरिष्ठ संवाददाता

मिलेनियम सिटी के राजकीय कॉलेजों की मेस एवं कैंटीन के टेंडर में गड़बड़ियों से ठेकेदारों में नाराजगी है। कई ठेकेदारों का आरोप है कि कॉलेजों में सिफारिश और नजदीकियों के चलते नियम बदलकर टेंडर आवंटित किए जा रहे हैं। उधर, कॉलेज की प्राचार्या ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि इसमें पूरी पारदर्शिता बरती गई है।

सेक्टर-14 स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में मेस के टेंडर किए गए हैं। इसमें टेंडर भरने वालों का आरोप है कि उनके आवेदनों में कमियां निकालकर सिफारिशी ठेकेदार को टेंडर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में सबसे कम रेट 850 रुपये का भरा गया था। टेंडर भरने वाले प्रदीप का आरोप है कि दस्तावेजों में जीएसटी नंबर को लेकर कमी निकाल दी। जब जीएसटी नंबर से जुड़ा मूल दस्तावेज मंगवाया, तब तक 899 रुपये में आवंटन कर दिया गया। अब टेंडर के रेट को बढ़ाकर 1100 रुपये छात्रा प्रति माह के करीब कर दिया है।

वहीं राजकीय द्रोणाचार्य कॉलेज में बिना टेंडर प्रक्रिया के ही मेस-कैंटीन को ठेका दे दिया गया है। इसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कॉलेज प्रबंधन ने लंबे समय से यहां पर मेस चलाने वालों को बिना ठेके के ही टेंडर दिया है। ठेका 1500 रुपये छात्रा प्रति माह के हिसाब से दिया गया है। इसी तरह कैंटीन को भी पुराने हिसाब से ही ठेके पर दिया गया है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि कॉलेज प्रबंधन ने बिना टेंडर के मेस-कैंटीन का ठेका क्यों दिया है।

ठेकेदारों ने की जांच कराने की मांग

राजकीय कॉलेजों में मेस-कैंटीन के टेंडर को लेकर ठेकेदारों ने जांच कराने की मांग की है। ठेकेदारों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन से जुड़े लोग सांठगांठ कर टेंडर दे रहे हैं। खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शिक्षा विभाग और हरियाणा सरकार राजकीय कॉलेजों में होने वाले टेंडरों की जांच कराए।

महिला कॉलेज में मेस ठेके के नियम अचानक से बदल दिए गए। पहले महिला मेस संचालक और गुरुग्राम निवासी को ही टेंडर दिया जाता था, लेकिन इस बार नियमों को बदलकर 24-25 वर्ष के लड़कों को टेंडर दे दिया। इससे छात्रावास में रहने वाली लड़कियों की सुरक्षा को लेकर दिक्कत हो सकती है।

अंजू चुग, पूर्व मेस संचालक

मेस टेंडर को लेकर 850 का सबसे कम रेट उनका था, लेकिन उनके दस्तावेजों में कमी निकलाकर उन्हें टेंडर नहीं दिया गया। इसके अलावा टेंडर को लेकर मौके पर कई शर्तें जोड़ दीं,ताकि पहले से तय व्यक्ति को टेंडर दिया जा सके।

-प्रदीप

मेस का जिन्हें टेंडर आवंटित किया गया उन्होंने लेने से मना कर दिया। इसके कारण रेट बढ़ाकर तीसरे व्यक्ति को टेंडर दिया गया। टेंडर प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गई है।

डॉ. सुशीला शर्मा, प्राचार्या (राजकीय महिला महाविद्यालय)

कॉलेज में मेस-कैंटीन का टेंडर फिलहाल ट्रायल पर दिया गया है। एक माह संचालन के बाद गुणवत्ता जांची जाएंगी। खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता ठीक नहीं होने पर टेंडर किया जाएगा।

डॉ. सुषमा चौधरी, प्राचार्या (राजकीय द्रोणाचार्य महाविद्यालय)

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  • Web Title:corruption in bid for canteen in government colleges