
वंदे मातरम गीत नहीं स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा: ओम प्रकाश
गुरुग्राम में 150 वर्ष पूर्ण होने पर वंदे मातरम का स्मरणोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा है। 4000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने सामूहिक गायन किया। प्रदर्शनी में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन और वंदे मातरम के महत्व को दर्शाया गया।
गुरुग्राम। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर शुक्रवार को स्मरणोत्सव मनाया गया। गुरुग्राम के सेक्टर-49 डीएवी पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओम प्रकाश धनखड़ ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम गीत स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा है। कार्यक्रम में 4,000 से अधिक छात्र-छात्राओं समेत सभी उपस्थित लोगों ने ठीक सुबह 09 बजकर 50 मिनट पर सावधान की मुद्रा में खड़े होकर एक स्वर में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया। यह विशेष सामूहिक गायन पूरे देश में इसी निर्धारित समय पर किया गया, जिसने राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और सामूहिक गौरव की भावना को और भी अधिक प्रबल रूप से पूरे राष्ट्र में प्रसारित किया।

आंदोलन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धुरी है: ओपी धनखड़ ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं है, यह भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धुरी है। यह गीत उन हजारों-लाखों क्रांतिकारियों की प्रेरणा रहा, जिन्होंने विदेशी शासन के सामने सिर नहीं झुकाया और मातृभूमि की रक्षा के लिए हँसते-हँसते फांसी का फंदा स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम उनकी नसों में बहती लौ थी। यह वही गीत था, जिसके साहस ने चंद्रशेखर आज़ाद को यह संकल्प दिया कि मैं आज़ाद पैदा हुआ हूं और आज़ाद ही मरूंगा। उन्होंने अत्याचार के आगे कभी सिर नहीं झुकाया, यह वंदे मातरम की ही आत्मा थी जिसने उन्हें अडिग खड़ा रखा। आज पूरा देश बड़े ही गर्व और गौरव के साथ ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। यह गीत हमें वीरता और बलिदान की याद दिलाता है। इस उत्सव के माध्यम से हमें यह संकल्प लेना है कि हम सिर्फ वंदे मातरम नहीं गाते, बल्कि भारत माता की वंदना करते हैं। उनके गौरव के लिए हमेशा समर्पित रहेंगे। प्रदर्शनी भी लगाई गई ओम प्रकाश धनखड़ ने वंदे मातरम के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन एवं कृतित्व पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। प्रदर्शनी में उनके जन्म, शिक्षा, साहित्यिक यात्रा, राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत उनकी सोच तथा वंदे मातरम गीत की रचना से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही वंदे मातरम गीत के इतिहास, इसकी प्रेरणादायी भूमिका और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने भारतीय जन-मानस में जो जोश और राष्ट्रीय चेतना जगाई, उसे भी विस्तार से दर्शाया गया है। इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त वत्सल वशिष्ठ, एसडीएम बादशाहपुर संजीव सिंगला, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद सुमित कुमार, भाजपा प्रदेश सचिव गार्गी कक्कड़, भाजपा जिलाध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी, जिला शिक्षा अधिकारी इंदु बोकन तथा डीएवी विद्यालय की प्राचार्या डॉ. चारु मणि समेत अन्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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