एल्युमिनियम के दाम बढ़ने से आटोमोबाइल उद्योगों में उत्पादन घटे

हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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गुरुग्राम में एल्युमिनियम की कीमतों में तेजी से वृद्धि ने ऑटोमोबाइल उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। कीमतें 300 से बढ़कर 450 रुपये प्रति किलो हो गई हैं, जिससे उत्पादन 20 प्रतिशत तक कम हो गया है। उद्योग में चिंता है कि बढ़ती लागत और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट से बिक्री में गिरावट होगी।

एल्युमिनियम के दाम बढ़ने से आटोमोबाइल उद्योगों में उत्पादन घटे

गुरुग्राम,अमर मौर्य। एल्युमिनियम की कीमतों में तेज उछाल के कारण ऑटोमोबाइल उद्योग में उत्पादन और आपूर्ति शृंखला पर नकारात्मक असर पड़ा है। एल्युमिनियम की कीमतें 300 प्रति किलो से बढ़कर 450 रुपये तक पहुंच गई हैं। जिसका सीधा असर ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं की लागत पर पड़ा है। लागत बढ़ने से उद्योगों में उत्पादन 20 प्रतिशत तक कम हो गए है। उद्योगों को डर सता रहा है कि ज्यादा उत्पादन करने से फिर से युद्ध हुआ तो सप्लाई बंद होने से नुकसान उठाना पड़ेगा। ऑटोमोबाइल उद्योग पर मुख्य प्रभावएल्युमिनियम की ऊंची कीमतों और आपूर्ति में रुकावट के कारण गुरुग्राम के एक हजार ऑटोमोबाइल उद्योग में उत्पादन कम करना पड़ा है।

वाहनों के व्हील से लेकर अन्य ऑटोपार्टस में एल्युमिनियम का उपयोग होता है। विशेष रूप से जो इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन कर रहे हैं, कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत से जूझ रहे हैं। क्योंकि आधुनिक वाहनों में एल्युमिनियम का उपयोग वजन कम करने के लिए प्रमुखता से किया जाता है। उद्यमियों ने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव (जैसे होर्मुज जलडमरू मध्य में बाधाएं) ने एल्युमिनियम की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है, इससे वैश्विक स्तर पर ऑटो सेक्टर पर दबाव बढ़ा है। ऑटो कंपोनेंट उद्योगों को इनपुट लागत बढ़ने के कारण अपने लाभ में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। अब वैकल्पिक सामग्रियों के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं।उत्पादन लागत में वृद्धि से नुकसानउद्योग विहार के उद्यमी शेखर तनेजा ने कहा किह आधुनिक गाड़ियों को हल्का और ईंधन-कुशल बनाने के लिए उनमें इंजन ब्लॉक, व्हील्स और बॉडी पार्ट्स में एल्युमिनियम का बहुत इस्तेमाल होता है। कच्चा माल महंगा होने से गाड़ी बनाने की कुल लागत बढ़ जाती है। कंपनियां बढ़ी हुई पूरी लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकतीं हैं। क्योंकि इससे डिमांड गिर सकती है। इस वजह से उनका मुनाफे का अंतर कम हो जाता है, जिससे वे उत्पादन कम कर देती हैं। इस समय उद्योगों को एल्युमिनियम के दाम बढ़ने से नुकसान हो रहा है।खरीदार पीछे हटने से बिक्री घटती हैउद्यमी विनोद कुमार ने कहा कि जब कंपनियां गाड़ियों के दाम बढ़ाती हैं, तो मिडिल-क्लास खरीदार पीछे हट जाते हैं, जिससे बिक्री घटती है और कंपनियां इन्वेंट्री जमा होने से बचने के लिए उत्पादन घटा देती हैं। कीमतों में उछाल सप्लाई की कमी की वजह से होता है, जिससे समय पर कच्चा माल न मिलने के कारण भी प्रोडक्शन लाइन रुक जाती है। एल्युमिनियम दाम बढ़ने पेय पदार्थों के दाम बढ़ने की संभावना जताई है।कच्चे माल के दाम बढ़ने से उत्पादन प्रभावितउद्यमी प्रवीण शर्मा ने कहा कि वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण हर कच्चे माल के दाम बढ़ने से उत्पादन प्रभावित होने लगा है। उद्योगों से निकला सामान बाजार में नए रेट नहीं मिलने से मिलने से उत्पादन कम करना पड़ता है। इस समय श्रमिकों के वेतन, कच्चा माल महंगा मिलना उद्योगों को नुकसान के अलावा फायदा नहीं हो रहा है।पेय पदार्थों के दाम बढ़ने की संभावना जताईउद्योगों ने एल्युमिनियम दाम बढ़ने पेय पदार्थों के दाम बढ़ने की संभावना जताई है। अभी उद्योगों की ओर से उत्पादन के दाम नहीं बढ़ाए है। अब मजबूरी में दाम बढ़ाना पड़ेगा। नहीं उद्योगों की पूंजी खत्म हो जाएगी तो उद्योग का संचालन करना मुश्किल हो जाएगा।

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