सख्ती: एक दिन की कमी पर भी नहीं मिल रहा दाखिला
- स्कूलों को सख्त निर्देश, 31 मार्च तक उम्र पूरी न होने पर एडमिशन से इनकार

गुरुग्राम। दाखिले के लिए इन दिनों बड़ी संख्या में अभिभावक सरकारी और निजी स्कूलों का रुख कर रहे हैं, लेकिन 6 साल की अनिवार्य आयु सीमा उनके लिए बड़ी बाधा बन गई है। स्थिति यह है कि एक-दो दिन की उम्र कम होने पर भी बच्चों को प्रवेश नहीं मिल रहा। 31 मार्च तक 6 वर्ष की आयु पूरी न होने के कारण पहली कक्षा के अभिभावकों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। विभाग की ओर से स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत क्लास-1 में दाखिले के लिए 6 वर्ष की आयु अनिवार्य है और इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
ऐसे में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे, जो 5 साल 11 माह के हैं या जिनकी उम्र 6 साल होने में कुछ दिन बाकी है, उन्हें प्रवेश नहीं मिल पा रहा है।एक दिन की कमी भी बन रही बड़ी वजह:स्कूलों में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां बच्चों की उम्र 1-2 दिन या कुछ दिनों से कम रह जाती है। बावजूद इसके नियमों के चलते उन्हें क्लास-1 में दाखिला नहीं दिया जा रहा। इस वजह से कई अभिभावक असमंजस में हैं कि वे बच्चों को एक साल पीछे की कक्षा में डालें या एक साल इंतजार करें। फाजिलपुर झाड़सा स्थित सरकारी स्कूल के हेड टीचर मुकेश ने बताया कि सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं कि 31 मार्च तक 6 वर्ष की आयु पूरी होना अनिवार्य है। ऐसे में हम नियमों से हटकर किसी भी बच्चे को दाखिला नहीं दे सकते। कई अभिभावक रोज स्कूल आ रहे हैं, लेकिन आयु पूरी न होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है।अभिभावकों की बढ़ी परेशानी, एडमिशन से हिचकिचाहट:अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों की उम्र कुछ ही दिनों से कम है, फिर भी उन्हें एक साल पीछे करना पड़ रहा है। ऐसे में कई पेरेंट्स अब एडमिशन लेने से भी हिचकिचा रहे हैं। वर्किंग पेरेंट्स के लिए यह समस्या और बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें बच्चों के लिए एक साल का अतिरिक्त प्लान बनाना पड़ रहा है। गुरुग्राम की एक अभिभावक अंजलि ने बताया कि मेरे बच्चे का जन्म 15 अप्रैल 2021 को हुआ है। वह अभी 4 साल 11 महीने 15 दिन का है और एलकेजी पूरी कर चुका है, लेकिन अब उसे यूकेजी में जाने की बजाय एलकेजी दोबारा करने को कहा जा रहा है। पहले स्कूल ने 15 दिन की छूट देने की बात कही थी, लेकिन अब सख्त नियमों के चलते ऐसा संभव नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि हमें पहले भरोसा दिलाया गया था कि उम्र की कमी को लेकर चिंता न करें, लेकिन अब स्कूल प्रशासन नियमों का हवाला देकर पीछे हट गया है।निजी स्कूल भी कर रहे सख्ती से पालन:सरकारी निर्देशों के चलते निजी स्कूल भी अब पूरी तरह सख्त हो गए हैं। पहले जहां कुछ मामलों में ग्रेस पीरियड या छूट मिल जाती थी, वहीं अब किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा रही। निजी स्कूल प्रबंधन का कहना है कि वे सरकार के नियमों से बंधे हैं और आयु सीमा पूरी न होने पर प्रवेश देना संभव नहीं है।ग्रेस पीरियड खत्म, बढ़ी दिक्कतें:पिछले वर्षों में 5.5 वर्ष या कुछ महीनों की कमी होने पर भी बच्चों को छूट मिल जाती थी और कई मामलों में ग्रेस पीरियड दिया जाता था। लेकिन इस बार यह पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब साफ नियम है। स्कूलों की मजबूरी:पालम विहार के एक निजी स्कूल की प्राइमरी हेड ने बताया कि इस वर्ष बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। हम सरकार की गाइडलाइन से बंधे हैं। 31 मार्च की आयु सीमा का पालन करना अनिवार्य है, इसलिए चाहकर भी ऐसे बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जा सकता। उन्होंने बताया कि पहले छह माह तक की छूट मिल जाती थी, जिससे अभिभावकों और स्कूलों दोनों को राहत रहती थी, लेकिन इस बार सख्ती से नियम लागू होने के कारण समस्याएं बढ़ गई हैं।
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