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बालकनी से संदिग्ध हालात में गिरा छात्र, मौत

बालकनी से संदिग्ध हालात में गिरा छात्र, मौत

संक्षेप:

गुरुग्राम के रामप्रस्थ सोसाइटी में 15 वर्षीय छात्र आसमान की संदिग्ध परिस्थितियों में बालकनी से गिरने से मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि छात्र अपनी परीक्षा में कम नंबर आने के कारण तनाव में था। घटना के बाद...

Sep 24, 2025 11:02 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गुड़गांव
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गुरुग्राम। रामप्रस्थ सोसाइटी सेक्टर-37डी में मंगलवार देर रात फ्लैट की बालकनी से गिरकर 15 वर्षीय छात्र की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। पुलिस इस मामले में आत्महत्या और हादसा दोनों की एंगल से जांच कर रही है। हालांकि, शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि छात्र अपनी अर्धवार्षिक परीक्षा में कम नंबर आने से तनाव में था, जिस कारण उसने यह कदम उठाया। पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम को पिता ने बेटे आसमान से परीक्षा में कम नंबर आने का कारण पूछा था, जिससे वह और भी अधिक निराश हो गया था। रात करीब 11 बजे सोसाइटी के लोगों ने एक जोरदार आवाज सुनी।

आवाज सुनकर सोसाइटी में राम का तैनात गार्ड मौके पर पहुंचा, तो उन्होंने आसमान को सोसाइटी परिसर में खून से लथपथ हालत में पाया। सूचना मिलते ही परिजन और पुलिस मौके पर पहुंचे। पुलिस के मुताबिक आसमान की नीचे गिरते ही मौके पर मौत हो गई थी। मौके पर पहुंचे लोगों ने उसकी पहचान की थी। जिसके बाद उसके परिजनों को बताया गया। हादसे के करीब 15 मिनट बाद परिजन ऊपर से नीचे आए। छात्र को अस्पताल लेकर गए,जहां पर डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। परीक्षा में कम अंक आने से तनाव में था आसमान घटना की जानकारी मिलने पर सेक्टर-10 थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी योगेश ने बताया कि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में परीक्षा में कम अंक आने से छात्र आसमान के तनाव में रहने को आत्महत्या का मुख्य कारण माना जा रहा है। दोस्तों और शिक्षकों से पूछताछ होगी पुलिस टीम ने सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या छात्र का व्यवहार घटना से पहले असामान्य था। जांच अधिकारी ने बताया कि वे छात्र के दोस्तों और शिक्षकों से भी पूछताछ करेंगे, ताकि उसके मन की स्थिति का पता लगाया जा सके। विशेषज्ञ बोले, बच्चों से खुलकर बात करना बेहतर विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अभिभावकों को बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए और उन्हें यह अहसास दिलाना चाहिए कि अंक ही सब कुछ नहीं हैं। बच्चों को यह भरोसा देना जरूरी है कि हर समस्या का समाधान बातचीत से हो सकता है। यह घटना हर माता-पिता, शिक्षक और समाज के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य को अनदेखा करना कितना खतरनाक हो सकता है।

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