काम की बात: ग्रेटर नोएडा के किसानों की बल्ले-बल्ले, जमीन के मुआवजे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

हिन्दुस्तान, ग्रेटर नोएडा
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड के एक फैसले से ग्रेटर नोएडा के किसानों की मौज हो गई है। प्राधिकरण ने जमीन के मुआवजे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है। मुआवजा बढ़ने से जमीन खरीद में तेजी आएगी। प्राधिकरण के पास पर्याप्त जमीन होने से नए सेक्टर विकसित किए जा सकेंगे। जमीन अधिग्रहण के लिए विशेष सेल गठित किया जाएगा।

ग्रेटर नोएडा में जमीन के मुआवजे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी।
ग्रेटर नोएडा में जमीन के मुआवजे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने गुरुवार को रक्षाबंधन पर किसानों को बड़ा तोहफा दिया। मुआवजा दर 4,125 रुपये से बढ़ाकर 6,415 रुपये प्रति वर्गमीटर किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मुआवजे की दर में रिकॉर्ड 55.5 फीसदी की वृद्धि की गई। जमीन का मुआवजा बढ़ने से ग्रेटर नोएडा में विकास परियोजनाओं को अब और रफ्तार मिलेगी।

शहर में नए सेक्टर विकसित किए जा सकेंगे। औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन की कमी दूर हो जाएगी। जमीन न मिलने की वजह से अधूरी पड़ी महत्वपूर्ण सड़कों को पूरा किया जा सकेगा। रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। दरअसल, मौजूदा मुआवजा दर 4,125 रुपये प्रति वर्गमीटर बाजार दर के मुकाबले काफी कम होने की वजह से क्षेत्र के किसान जमीन देने को राजी नहीं हो रहे थे। इससे शहर का विस्तार नहीं हो पा रहा था। यहां निवेश के लिए आगे आ रही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों को जमीन आवंटित करने में प्राधिकरण को दिक्कत हो रही थी।

जमीन की कमी की वजह से ही सौर ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी अवाडा को ग्रेटर नोएडा वेस्ट इलाके के सेक्टर इकोटेक-16 से सेक्टर इकोटेक-10ए में स्थानांतरित करना पड़ा। ग्रेटर नोएडा ईस्ट और वेस्ट को जोड़ने वाली 130 मीटर चौड़ी सड़क का यमुना सिटी तक विस्तार भी नहीं हो पा रहा था। इसके साथ ही क्षेत्र में कई सड़कों का काम अधूरा पड़ा है।

ग्रेटर नोएडा के सीईओ रवि कुमार एनजी का कहना है कि मुआवजा बढ़ने से जमीन खरीद में तेजी आएगी। पिछले कुछ वर्षों के दौरान के शहर में आवासीय सहित सभी श्रेणी के भूखंडों की मांग बढ़ी है। प्राधिकरण के पास पर्याप्त जमीन होने से नए सेक्टर विकसित किए जा सकेंगे। प्राधिकरण बोर्ड ने इस बार मुआवजा राशि में 2290 रुपये की वृद्धि की है। किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया गया है।

लैंडबैंक बनाने में मदद मिलेगी

उद्योगों के लिए क्षेत्र के पौवारी, इमलियाका,अटाई मुरादपुर, लुक्सर, दादूपुर, लडपुरा, खानपुर, सिरसा, वैदपुरा, जान समाना, सुनपुरा, भोला रावल, धूममानिकपुर, खेड़ी, आमका, किराचपुर उर्फ कैलाशपुर, खोदना कलां, भनौता व खोदना खुर्द आदि गांवों में जमीन की खरीदारी की जा रही है। इससे लगभग 1000 हेक्टेयर का लैंडबैंक बनाने में मदद मिलेगी।

औद्योगिक इकाइयां स्थापित होंगी

प्राधिकरण ने 130 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की योजना बनाई है। 130 मीटर सड़क के किनारे सेक्टर इकोटेक-8 और नौ हैं। जमीन खरीद में तेजी आने पर औद्योगिक इकाइयों को भूखंड आवंटित करना आसान हो जाएगा।

जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा

मुआवजा बढ़ाने के साथ प्राधिकरण जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी सरल बनाएगा। इसके लिए एसीईओ की अध्यक्षता में जमीन अधिग्रहण सेल गठित किया जाएगा। यह सेल जमीन खरीद की प्रक्रिया को पूरी कराने में किसानों का सहयोग करेगा। मुआवजा बांटने की प्रक्रिया भी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी। मुआवजा राशि किसान के खाते में ट्रांसफर की जाएगी। आबादी भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 40 वर्गमीटर और अधिकतम 2500 वर्ग मीटर होगा।

प्राधिकरण अलग सेक्टर भी विकसित करेगा

मुआवजे के साथ छह फीसदी आबादी भूखंड का लाभ लेने वाले किसानों के लिए अलग सेक्टर विकसित किए जाएंगे। अधिकारी के मुताबिक ये सेक्टर भी शहर के अन्य सेक्टरों जैसे आवासीय, औद्योगिक और बिल्डर सेक्टर के साथ उसी तर्ज पर विकसित होंगे। प्राधिकरण के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री करने के साथ ही किसानों को आबादी भूखंड का आरक्षण पत्र जारी कर दिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को भूमि का मूल्य देना ही नहीं, उन्हें शहर के विकास से जोड़ना है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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