कलियुग का 'श्रवण कुमार': दादी की जान बचाने को पोते ने छोड़ी CBSE बोर्ड परीक्षा, लिवर दान कर दिया नया जीवन

Apr 20, 2026 08:25 am ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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आज के दौर में जहां लोग छोटी-छोटी बातों पर रिश्तों से मुंह मोड़ लेते हैं, वहीं 19 साल के एक लड़के ने रिश्तों की एक नई परिभाषा लिख डाली है। उसने अपनी बुजुर्ग दादी की जान बचाने को करियर की चिंता किए बिना न सिर्फ अपनी बोर्ड परीक्षा छोड़ दी बल्कि लिवर दान करने का भी फैसला किया। 

कलियुग का 'श्रवण कुमार': दादी की जान बचाने को पोते ने छोड़ी CBSE बोर्ड परीक्षा, लिवर दान कर दिया नया जीवन

गंभीर बीमारी से जूझ रही एक बुजुर्ग महिला को अपने 19 साल के पोते की बदौलत अब नया जीवन मिल गया है। पोते ने दादी की गंभीर हालत को देखते हुए ने केवल अपनी बोर्ड परीक्षा छोड़ दी, बल्कि दादी की जान बचाने के लिए अपना लिवर तक दान कर दिया। अब दादी-पोता दोनों ही स्वस्थ हैं।

बिहार के हाजीपुर में रहने वाली 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला सुनीता देवी को 31 जनवरी 2026 को गंभीर हालत में गाजियाबाद के वैशाली स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लिवर एवं पित्त विज्ञान केंद्र, मैक्स के समूह अध्यक्ष डॉ. सुभाष गुप्ता ने बताया कि सुनीता देवी लिवर सिरोसिस बीमारी से पीड़ित थीं। उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। परिजनों से बात कर लिवर ट्रांसप्लांट करने पर सहमति बनी। लिवर डोनेट करने के लिए सुनीता के बेटे और बहू समेत अन्य कई परिजनों की जांच की गई, लेकिन वे दान के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए। इसके बाद उनके 19 वर्षीय पोते आदित्य राज ने आगे आकर दादी को अपना लिवर दान देने की इच्छा जताई। डॉक्टरों द्वारा जरूरी जांच में आदित्य लिवर दान देने के लिए पूरी तरह उपयुक्त पाए गए और उनके परिजनों ने भी इसकी सहमति दे दी, जिसके बाद ट्रांसप्लांट किया गया।

आदित्य के लिवर का दायां हिस्सा ट्रांसप्लांट किया गया

डॉ. राजेश डे ने बताया कि जीवित दाता लिवर ट्रांसप्लांट विधि के तहत आदित्य के लिवर का दायां हिस्सा (करीब 710 ग्राम) ट्रांसप्लांट किया गया। 2 फरवरी को सफल प्रत्यारोपण हुआ और इसके बाद दो सप्ताह तक दोनों को कड़ी निगरानी में रखा गया। 17 फरवरी को आदित्य और उनकी दादी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। डॉ. राजेश ने बताया कि आदित्य के जीवन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कठिन फैसले में सबने साथ दिया

आदित्य अपने परिवार के साथ हाजीपुर में ही रहते हैं। उनके पिता जैविक खेती करते हैं। आदित्य हाजीपुर के ही एक विद्यालय में 12वीं में पढ़ाई कर रहे हैं। आदित्य ने बताया कि 17 फरवरी को अस्पताल से छुट्टी मिली थी और इसी दिन से बिहार में उनकी सीबीएसई बोर्ड की 12वीं की परीक्षा थी। डॉक्टरों की सलाह अनुसार, उन्होंने अस्पताल से छुट्टी के लिए जल्दबाजी नहीं की और परीक्षा छोड़ दी। यह कठिन फैसला था, जिसमें पूरे परिवार ने उनका साथ दिया। आदित्य का कहना है कि दादी की तबीयत ज्यादा खराब थी, इसीलिए ट्रांसप्लांट भी ज्यादा देर नहीं टाला जा सकता था। आदित्य का कहना है कि दादी से वह बेहद करीब हैं।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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