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17 जनवरी, 2021|11:44|IST

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यूपी गेट पर जोर आजमाइश तेज

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ट्रांस हिंडन | संवाददाता

यूपी गेट बॉर्डर पर जमा किसानों की दिल्ली जाने की जोर आजमाइश रविवार को जारी रही। किसान दिल्ली में जंतर मंतर या रामलीला मैदान जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस किसानों को सिर्फ बुराड़ी जाने के लिए रास्ता देने को तैयार है। किसान इसके लिए राजी नहीं हैं।

रविवार को दिनभर में किसानों ने तीन बार बेरिकडिंग हटाकर दिल्ली जाने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन भाकियू के शीर्ष नेतृत्व ने किसानों को समझाकर वापस बुलाया। शाम को किसानों के बेरिकेडिंग हटाने के प्रयास के बाद भाकियू ने खुद ही बेरिकेडिंग से पहले रस्सी बांध दी है। जिससे युवा किसान बेरिकेडिंग की तरफ ना जाएं। भाकियू का कहना है कि वह बिना बात किए दिल्ली में नहीं जाएंगे।

सुबह भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के कहने पर एक प्रतिनिधिमंडल बुराड़ी के लिए रवाना हुआ। इसी बीच किसानों के एक जत्थे ने सुबह करीब 11:30 बजे ट्रैक्टर-ट्राली के साथ अचानक नारेबाजी करते हुए बैरिकेटिंग पर चढ़कर नारेबाजी शुरु कर दी। कई किसान बैरिकेटिंग उठाकर रास्ते से पलटने लगे। दिल्ली पुलिस किसानों को रोकने की कोशिश करती रही। इसके थोड़ी देर बाद किसान वापस लौट गए।

इस दौरान दोबारा बैरिकेटिंग लगा दी गई। दोपहर करीब डेढ़ बजे फिर किसानों के एक जत्थे ने दिल्ली पुलिस की तरफ से लगाई गई बेरिकेडिंग तोड़कर घुसने का प्रयास किया, लेकिन राकेश टिकैत ने किसानों को मनाकर वापस बुलाया। शाम करीब छह बजे बुलंदशहर से आए किसानों के एक जत्थे ने तीसरी बार बैरिकेटिंग तोड़कर लाठी ड़डो के साथ आगे बढ़ने की कोशिश की। हर बार किसानों को समझाकर वापस बुलाया गया। इस मौके पर भाकियू युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव टिकैत, ओमपाल मलिक, धीरज बालियान, संजय चौधरी, विजय शास्त्री, गुड्डू प्रधान, बिशन सिंह सिरोही, मनोज मावी, माँगेराम त्यागी समेत अनेक किसान डटे हुए हैं।

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि यूपी गेट पर जमा किसानों को दिल्ली जाने की कोई जल्दी नहीं है। सरकार को वार्ता करनी है तो किसानों के पास आना होगा। यूपी गेट से किसान बुराड़ी नहीं जाएंगे। गृहमंत्री ने बुराड़ी में ही वार्ता करने का प्रस्ताव दिया है यह निराशाजनक है। भाकियू का कहना है कि सरकार किसान विरोधी बिल वापस ले और न्यूनतम समर्थन मूल्य की लिखित गारंटी का फैसला करती है तो वह बॉर्डर से ही वापस जाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि किसान जंतर-मंतर, रामलीला मैदान या प्रगति मैदान जाकर शांतिपूर्ण आंदोलन करना चाहते हैं। यह उनका संवैधानिक अधिकार है। इस संबंध में सरकार यदि जल्दी फैसला नहीं लेती है तो लोनी बॉर्डर को भी जाम कर आंदोलन तेज किया जाएगा।