Students will check quality of mid day meal in schools - स्कूलों में मिड डे मील की गुणवत्ता जांचेंगे छात्र DA Image

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स्कूलों में मिड डे मील की गुणवत्ता जांचेंगे छात्र

स्कूलों में मिलने वाले मिड डे मील की गुणवत्ता जांचने के लिए छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे स्कूलों में मिलने वाले भोजन में की गई मिलावट का छात्र आसानी से पता लगाएंगे। मिड डे मील की जांच कराने के लिए अब प्रयोगशाला भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बच्चों को दोपहर में मिड डे मील दिया जाता है। मिड डे मील की गुणवत्ता जांचने के लिए जिले में कोई सुविधा नहीं है। स्कूलों में रसोइया और स्कूल प्रबंधन मनमाने तरीके से बच्चों को दोपहर का भोजन दे रहे हैं। कुछ स्कूलों का भोजन बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने ठेकेदारों को जिम्मा दे रहा है। इसमें कई बार कीड़े मिलने के मामले भी सामने आए हैं। इसको ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने जनपद के सभी स्कूलों में प्रशिक्षण देने की कवायद तेज कर दी है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी स्कूलों में रोजाना एक घंटे प्रशिक्षण दे रहे हैं। एक घंटे के प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को खाद्य पदार्थों में मिले रसायन का पता लगाने के विभिन्न तरीके बताए जा रहे हैं। साथ ही अभिभावकों को भी स्कूल में चलने वाली क्लास में बुलाया जा रहा है। उन्हें भी बाजार से लाए गए मसालों और अन्य खाद्य साम्रगी में मिलावट जांचने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जो परिजन स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं, उन्हें घर जाकर जागरूक किया जाएगा। इससे बच्चों को संतुलित भोजन खाने को मिलेगा।

येलो बुक में पूरी जानकारी मिलेगी

खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में येलो बुक-1 और येलो बुक-2 का का वितरण किया जा रहा है। बुक-1 में छात्रों को साफ सफाई रखने की जानकारी दी गई है जबकि बुक-2 में बच्चों को खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट को पहचानने का तरीका बताया गया है। किताब में हर खाद्य पदार्थ में होने वाली मिलावट की पहचान करने के अलग-अलग तरीके बताए गए हैं। फूड सेफ्टी स्कूल चिल्ड्रन किताबें भी बच्चों को स्कूलों में दी जा रही हैं। बच्चों को कोई भी खाद्य सामग्री खाते समय किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। इसकी सभी जानकारी इस किताब में दी गई है।

जनपद में नहीं है प्रयोगशाला

जनपद में 593 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल हैं। इनमें कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 72 हजार है। सरकार की ओर से दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता जांचने के लिए जिले में एक भी प्रयोगशाला नहीं है। मिड डे मील खाने से आए दिन बच्चों के बीमार होने के मामले सामने आते रहते हैं। छात्र प्रशिक्षण लेकर स्कूल में दिए जाने वाले खाने की जांच आसानी से कर सकेंगे। इससे भोजन में की जाने वाली मिलावट पर रोक लगेगी और बच्चों को संतुलित भोजन मिलना शुरू हो जाएगा।

वर्जन

स्कूलों में मिलने वाले मिड डे मील में होने वाली मिलावट को रोकने के लिए छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी स्कूलों में जाकर रोजाना एक घंटे की क्लास ले रहे हैं। इसमें बच्चे खाने की गुणवत्ता जांचने के तरीके सीख रहे हैं।

- एनएन झा, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी

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