Seven Badmaash Arrests of Bavaria Gang - बावरिया गिरोह के सात बदमाश गिरफ्तार DA Image
15 नबम्बर, 2019|3:38|IST

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बावरिया गिरोह के सात बदमाश गिरफ्तार

लोनी। संवाददाता ट्रॉनिका सिटी पुलिस ने बावरिया गिरोह के सात बदमाशों को तमंचा एवं चाकुओं के साथ गिरफ्तार किया है। बदमाशों के कब्जे से एक स्कार्पियो बरामद हुई है। यह गिरोह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में दो तीन दिन से ट्रॉनिका सिटी में डेरा डाले था। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। ट्रॉनिका सिटी थाना प्रभारी रोजन्त त्यागी ने बताया कि गुरुवार रात 2.30 बजे मुखबिर की सूचना पर ट्रॉनिका सिटी के जंगल से बावरिया गिरोह के सात शातिर बदमाशों को एक तमंचा व छह चाकुओं के साथ गिरफ्तार किया गया। बदमाशों के कब्जे से एक स्कार्पियो भी बरामद हुई है। सभी बदमाश भरतपुर राजस्थान के रहने वाले हैं और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में ट्रॉनिका सिटी में छिपकर रह रहे थे। बदमाशों ने अपना नाम राकेश पुत्र रतनसिंह बावरिया, शेरू पुत्र सूरजपाल, जितेन्द्र पुत्र सूरजपाल निवासीगण रंजीतनगर भरतपुर, भीम पुत्र महेन्द्र निवासी चक जलालाबाद रघुपरा नोएडा, ओमकार पुत्र पप्पू आनन्द नगर भरतपुर राजस्थान, आकश उर्फ मिठ्ठू पुत्र पपई निवासी हरईया राजस्थान बताया है। वारदात में सरिये एवं डडों का करते हैं इस्तेमाल बावरिया गिरोह के आठ-दस सदस्य गाड़ी लेकर कई-कई दिनों के लिए घर से निकल जाते हैं। ये अपने साथ मोबाइल एवं अधिक हथियार नहीं रखते। गिरोह के सरगना के पास ही एक मोबाइल होता है। इसका प्रयोग भी आवश्यकता के समय ही किया जाता है। जिस क्षेत्र में वारदात करते हैं, पहले कई दिनों तक वहां रेकी करते हैं और टारगेट निश्चित करने के बाद अपनी गाड़ी को दूर खड़ा कर पेड़ों से डंडे एवं निर्माणाधीन भवनों के बाहर पड़े सरियों का इस्तेमाल हथियार के रूप में करते हैं। वारदात के बाद डंडों एवं सरियों को भी वहीं फेंक देते हैं और दूर किसी स्थान के लिए रवाना हो जाते हैं। चोरी, लूट, डकैती करता है गिरोह बावरिया गिरोह सभी प्रकार के अपराध करता है। घरों एवं सड़कों पर लूट, राहजनी, घरों में चोरी, डकैती आदि जैसा। मौका लगते ही घटना को अंजाम देते हैं। वारदात के समय ये लोगों को पीट पीटकर अधमरा कर देते हैं या मौत के घाट उतार देते हैं। पहले से नियुक्त होता है वकील यह गिरोह पहले से अपना वकील नियुक्त रखते हैं। जिसे हर माह वेतन दिया जाता है। वारदात के समय गिरोह के किसी सदस्य के पकड़े जाने पर वकील खुद ही पैरवी शुरू कर देता है, जबकि कुछ तथा कथित पत्रकार भी गिरोह के संपर्क में रहते हैं। आवश्यकता पड़ने पर वह भी थाने चौकी पहुंचकर गिरोह की मदद करते हैं।

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