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एआई ऑटोनॉमस ड्राइविंग बॉट बनाकर हर्ष और मयंक ने गुजरात में लहराया परचम

एआई ऑटोनॉमस ड्राइविंग बॉट बनाकर हर्ष और मयंक ने गुजरात में लहराया परचम

संक्षेप:

गाजियाबाद के सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल के छात्रों हर्ष गुप्ता और मयंक चौधरी ने रोबोफेस्ट-गुजरात 5.0 में एआई ऑटोनॉमस ड्राइविंग बॉट प्रोजेक्ट के लिए एक लाख का अनुदान और 25 हजार रुपये का नगद पुरस्कार जीता। उनका प्रोजेक्ट बिना मानवीय हस्तक्षेप के वाहन संचालन में सक्षम है, जिसे प्रतियोगिता के विभिन्न स्तरों के लिए चुना गया।

Jan 19, 2026 09:03 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गाज़ियाबाद
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- रोबोफेस्ट-गुजरात 5.0 में प्रदर्शन के बाद प्रतियोगिता के अगले चरण के लिए चुना गया प्रोजेक्ट - 25 हजार नकद पुरस्कार के साथ एक लाख की अनुदान राशि भी मिलेगी रोबोफेस्ट–गुजरात 5.0 में जिले के सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल के छात्रों की बड़ी उपलब्धि, AI ऑटोनॉमस ड्राइविंग बॉट से देशभर में बनाई पहचान गाजियाबाद, कार्यालय संवाददाता। जिले के छात्र हर्ष गुप्ता और मयंक चौधरी ने रोबोफेस्ट-गुजरात 5.0 में बड़ी उपलब्धि हासिल की। इनके प्रोजेक्ट एआई ऑटोनॉमस ड्राइविंग बॉट को प्रतियोगिता के लेवल एक, लेवल दो और लेवल तीन के लिए चुना गया है। इसके लिए इन्हें एक लाख की अनुदान राशि और 25 हजार का नगद पुरस्कार भी मिला।

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हर्ष गुप्ता और मयंक चौधरी दोनों सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल के कक्षा 11वीं के छात्र हैं। इन्होंने एआई ऑटोनॉमस ड्राइविंग बॉट प्रोजेक्ट तैयार किया है। यह प्रोजेक्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक पर काम करता है, जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के वाहन को सुरक्षित और स्मार्ट तरीके से संचालित करने की क्षमता रखता है। इनके इस नवाचार को प्रतियोगिता के लेवल एक और लेवल दो (प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट)के लिए चुना गया है। इसके लिए इन्हें 25 हजार रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान किया गया है। सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल के वाइस चेयरमैन नमन जैन ने कहा कि हर्ष और मयंक की यह उपलब्धि स्कूल के लिए गर्व का विषय है। इनसे दूसरे छात्रों को भी विज्ञान, तकनीक और नवाचार में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा मिलेगी। वहीं, स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने छात्रों की सराहना की। एक लाख का अनुदान मिलेगाः दोनों छात्रों के प्रोजेक्ट की गुणवत्ता, उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए इसे एआई ऑटोनॉमस ड्राइविंग बॉट श्रेणी में लेवल तीन (प्रोटोटाइप चरण) के लिए भी चयनित किया गया है। इस चरण में एक वास्तविक ऑटोनॉमस कार मॉडल विकसित किया जाएगा। इसके लिए गुजरात काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने एक लाख रुपये के अनुदान की सहायता देने की घोषणा की है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।