ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News NCR गाज़ियाबाद अस्पतालों में सांस और दमे के 30% मरीज बढ़े

अस्पतालों में सांस और दमे के 30% मरीज बढ़े

जिले में प्रदूषण और सर्दी की वजह से पुराने मरीजों की सेहत बिगड़ रही है। करीब 20 प्रतिशत से ज्यादा बीपी, शुगर और किडनी के मरीज ओपीडी में आ रहे...

अस्पतालों में सांस और दमे के 30% मरीज बढ़े
हिन्दुस्तान टीम,गाज़ियाबादTue, 28 Nov 2023 06:45 PM
ऐप पर पढ़ें

गाजियाबाद। जिले में प्रदूषण और सर्दी की वजह से पुराने मरीजों की सेहत बिगड़ रही है। करीब 20 प्रतिशत से ज्यादा बीपी, शुगर और किडनी के मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। वहीं, सांस और दमे के मरीजों में भी 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
एमएमजी अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को 1548 मरीजों का पंजीकरण हुआ। इनमें बुखार के 237 मरीज रहे। फिजिशियन की ओपीडी में रोज ब्लड प्रेशर, शुगर, किडनी और लीवर के पुराने मरीज बढ़े हैं। संयुक्त अस्पताल में 836 मरीज आए। इनमें से 223 से ज्यादा पुरानी बीमारी और सांस से संबंधित रहे। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि प्रदूषण और सर्दी की वजह से पुराने मरीजों के साथ सांस, दमे के रोगियों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इनमें कोई गंभीर लक्षण देखने को नहीं मिल रहे हैं। उन्हें सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही।

चार मरीजों की मौत

जिला एमएमजी अस्पताल में गोशाला फाटक चांद मस्जिद निवासी 50 वर्षीय व्यक्ति अन्नू की सुबह पौने नौ बजे मौत हो गई। वहीं, संयुक्त अस्पताल में सांस की शिकायत लेकर सोमवार रात नौ बजे आए सतेंद्र चौधरी ने इलाज के दौरान मंगलवार सुबह चार बजे दम तोड़ दिया। इसके अलावा पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंचे छंगी सिंह को सोमवार रात साढ़े 10 बजे भर्ती कराया गया था। लेकिन उसने भी इलाज के दौरान देर रात पौने दो बजे दम तोड़ दिया।

इसी तरह संजयनगर निवासी 37 वर्षीय महिला संतोष को भी तड़के सुबह पौने चार बजे इमरजेंसी में गंभीर दशा में लाया गया था। लेकिन जांच के बाद उन्हें भी मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों के मुताबिक महिला को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत हो रही थी। संयुक्त अस्पताल के सीएमएस डा. विनोद चंद पांडेय ने बताया कि इमरजेंसी में गंभीर अवस्था में लाया गया था।

फेफड़ों में संक्रमण की समस्या हो रही

ईएनटी सर्जन डॉ. बीपी त्यागी का कहना है कि हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 और 10 में सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से हवा प्रदूषित हो जाती है। इनके नाक के रास्ते साइनस में जाने से फेफड़ों में संक्रमण हो रहा। शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने से अस्थमा, हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक और अल्जाइमर जैसी बीमारी होती है। आंखों में प्रदूषण से आंखों में लालीपन की शिकायत बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि इस समय ठंड और प्रदूषण से खुद का बचाव करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा बच्चों और बुजुर्गों के मामले में तो कतई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर से मिलें।

ये सावधानी बरतें

शरीर पर गर्म कपड़े पहनें

स्वच्छता का ध्यान रखें

नियमित रूप से स्किन को मॉस्चराइज करें

ठंडा पानी पीने से बचें

तेज गर्म पानी के स्नान से बचें

ल्ल पौष्टिक भोजन करें

मौसम बदलने से अस्पताल में सांस के मरीजों के साथ पुरानी बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। लेकिन इनका ओपीडी से ही उपचार किया जा रहा है।

-डॉ. मनोज चतुर्वेदी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला एमएमजी अस्पताल

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें