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उद्योगों में आग से बचाव के इंतजाम पर लापरवाही

गाजियाबाद/ट्रांस हिंडन। हिटीजनपद में बड़ी संख्या में ऐसे उद्योग हैं। इनमें आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। इनमें से ज्यादातर ने उद्योग खोलते समय अग्निशमन विभाग की एनओसी ली, लेकिन नवीनीकरण नहीं कराया। ऐसे में शहर में लगातार उद्योगों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही है। उद्योग के अलावा आवासीय और व्यवसायिक क्षेत्रों में भी आग लगने की कई घटनाएं हुई हैं। पांच वर्षों में ही जनपद में 3771 छोटे-बड़े अग्निकांड हुए हैं जिनमें 1.6 अरब रुपये की संपति का नुकसान हुआ है। जबकि 46 लोगों की जान गई है।गाजियाबाद औद्योगिक नगरी है। यहां सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) की छोटी-बड़ी लगभग 12 हजार औद्योगिक इकाइयां संचालित है। इसमें फैब्रिकेशन पार्ट बनाने, कपड़ा, पैकेजिंग टेक्सटाइल, हार्डवेयर, शुगर प्लांट, सिमेंट प्लांट, पेपर प्लांट, सीएफएल बल्ब आदि का उत्पाद तैयार होता है। इन इकाइयों में से ज्यादातर ने इकाई खोलने के समय अग्निशमन विभाग की एनओसी ली थी, लेकिन हर साल फायर की एनओसी का नवीनीकरण कराना होता है। इनमें से कई इकाइयां नवीनीकरण नहीं कराती है। ऐसे में आग बुझाने के लिए लगाए गए अग्निशमन यंत्र खराब हो जाते हैं। हादसा होने की स्थिति में खराब यंत्र किसी काम नहीं आते। --इन क्षेत्रों में है उद्योगगाजियाबाद में 15 से ज्यादा औद्योगिक क्षेत्र है। इसमें मुख्य रूप से कविनगर, बुलंदशहर, साउथ साइड जीटी रोड, साहिबाबाद, मेरठ रोड, उद्योग कुंज एनएच-24, डासना, एमजी रोड (मसुरी गुलावढ़ी) ट्रॉनिका सिटी लोनी, लोनी इंडस्ट्रियल इस्टेट, मुकंदनगर, पांडवनगर, अमृत इस्टील कंपाउंड, आनंद इंडस्ट्रियल इस्टेट, मोहननगर इंडस्ट्रियल इस्टेट, पंजाब ऑल एक्सपेलर कंपाउंड, लोनी रोड इंडस्ट्रियल एरिया, एक्स्पेलर कंपाउंड, लोनी रोड इंडस्ट्रियल एरिया आदि हैं।--व्यवसायिक कार्यस्थलों में भी नहीं होती नियमों का पालनशहर में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक कार्य भी होता है। लेकिन इन शोरूमों या दुकानों पर भी फायर एनओसी की अनदेखी की जा रही है। इसका नतीजा पिछले साल आरडीसी में लगी ऑफिस हैं। जहां लोगों को भागने के लिए रास्ता तक नहीं मिला था।--ट्रॉनिका सिटी में नही स्थापित हुआ फायर स्टेशनलोनी में ट्रॉनिका सिटी, आर्यनगर, रूपनगर स्वीकृत औद्योगिक क्षेत्र हैं। जबकि कृष्णा विहार, अमित विहार, गोविन्द टाऊन, राहुल गार्डन, शिववाटिका, शक्ति गार्डन एवं प्रेमनगर आदि कॉलोनियों में भी सैकड़ों की संख्या में अवैध फैक्टरियां चल रहीं हैं। क्षेत्र में मेन बाजार, गिरी मार्केट, इंद्रा मार्केट, लक्ष्मी गार्डन, जवाहरनगर, शांतिनगर, चिरौड़ी गांव में बाजार हैं तथा अधिकांश कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। दर्जनों मैरिज होम भी हैं। गत चार वर्षों के दौरान करीब एक दर्जन फैक्टरियों में आगजनी की बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी यहां फायर स्टेशन की स्थापना नही हुई है तथा फैक्टरियों में भी आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम नही हैं। चार वर्ष पूर्व फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी ट्रॉनिका सिटी थाने पर तैनात की गई थी। बड़ी घटना होने पर साहिबाबाद एवं गाजियाबाद से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बुलाई जाती हैं। जिनको यहां पहुंचने में एक घंटे का समय लगता है और तब तक बड़ा नुकसान हो चुका होता है। ट्रॉनिका सिटी मैन्युफैक्चरिंग एसोशिएसन के सचिव अनिल कुमार, रूपनगर औद्योगिक क्षेत्र की यंग रूलर इंडस्ट्रियल एसोशिएसन के सचिव जितेन्द्र यादव, आर्यनगर इंडस्ट्रियल एसोशिएसन के अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल, लोनी उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष रतन सिंह भाटी, लालबाग सब्जी मंडी आढ़ती संघ के अध्यक्ष मानसिंह आढ़ती का कहना है कि लोनी में तत्काल बड़े फायर स्टेशन की स्थापना होनी चाहिए।आग की बड़ी घटनाएंजून 2017-कविनगर औद्योगिक क्षेत्र की केमिकल फैक्टरी में भीषण आग। एक की मौत। मई 2016-आरडीसी में निजी कंपनी के दफ्तर में भीषण आग लगी। पांच कर्मचारियों की मौत11 नवंबर 2016 को शहीद नगर की जैकेट फैक्टरी में भीषण आग, 11 कर्मचारियों की मौत-29 मई 2018 को लोनी के मैन बाजार में अरशद के मेडिकल स्टोर में आग लगी आठ लाख का नुकसान हुआ-29 मई 2018 को ट्रॉनिका सिटी में रामकुमार की आटो पार्टस एवं डाई बनाने की फैक्टरी में आग लगी, 15 लाख का नुकसान हुआ-15 अप्रैल 2018 को लोनी थाने के सामने अभिनंदन वाटिका मैरिज होम में आग लगी करीब 35 लाख का नुकसान हुआ-14 मार्च 2018 को ट्रॉनिका सिटी में गिरीराज पैकेजिंग में आग लगी 30 लाख का नुकसान हुआ-17 अप्रैल 2017 को टेलीफोन एक्सचेंज के पास यूपीएसआईडीसी के राका इंटनेशनल फैक्टरी में आग लगी लाखों का नुकसान हुआ--आग लगने के प्रमुख कारण80 फीसदी आग शार्ट सर्किट की वजह से 5 फीसदी आग लापरवाही की वजह से 15 फीसदी आग अन्य वजहों से --जनपद में हुए अग्निकांडवर्ष अग्निकांड नुकसान2018 170 86 लाख रुपये2017 1035 32.37 करोड़ रुपये 2016 907 51.49 करोड़ रुपये2015 784 34.08 करोड़ रुपये2014 873 45.64 करोड़ रुपये(नोट-वर्ष 2018 के आंकड़े फरवरी माह तक के हैं)--अग्निशमन विभाग के संसाधनपद जरुरत उपलब्धताएफएसओ 5 5लीडिंग फायरमैन 18 13चालक 22 25फायरमैन 112 91--फायर टेंडर बड़ा 7फायर टेंडर छोटा 4वाटर मिस्ट हाइप्रेशर 3हाइड्रोलिक प्लेटफार्म 1

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  • Web Title:No fire safety arrangements in industries