Hindi NewsNcr NewsGhaziabad NewsNational Epilepsy Day Importance of Regular Treatment Over Home Remedies
मिर्गी के दौरे पड़ने की कोई उम्र नहीं, बच्चे भी बीमारी से पीड़ित

मिर्गी के दौरे पड़ने की कोई उम्र नहीं, बच्चे भी बीमारी से पीड़ित

संक्षेप: राष्ट्रीय मिर्गी दिवस (17 नवंबर) पर, गाजियाबाद के अस्पतालों में हर साल 1000 से 1200 मरीज मिर्गी के इलाज के लिए पहुंचते हैं। मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है, जो समय पर इलाज न कराने पर गंभीर हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित दवा, उचित आहार और जीवनशैली से मिर्गी के दौरे नियंत्रित किए जा सकते हैं।

Sun, 16 Nov 2025 07:17 PMNewswrap हिन्दुस्तान, गाज़ियाबाद
share Share
Follow Us on

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस (17 नवंबर) - देसी नुस्खों के बजाए नियमित इलाज से ठीक हो सकती है मिर्गी - जिला अस्पतालों में हर साल 1000 से 1200 मरीज पहुंच रहे गाजियाबाद, संवाददाता। मिर्गी ऐसी बीमारी है, जो किसी भी उम्र में हो सकती है। जिले के सरकारी अस्पतालों में हर साल अनुमानित 1200 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। एमएमजी और संयुक्त जिला अस्पताल में मिर्गी के मरीजों की स्थिति जानने के लिए सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि, ईजी नामक टेस्ट के लिए मरीजों को रेफर किया जाता है। आपने सड़क पर चलते हुए व्यक्ति के अचानक जमीन पर गिरने और शरीर ऐंठने के साथ मुंह से झाग निकने की घटना को देखा होगा।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

इस बीमारी को मिर्गी का दौरा कहा जाता है। 17 नवंबर को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मिर्गी के प्रति जागरुकता बढ़ाने और गलत धारणाओं को दूर करने का महत्वपूर्ण अवसर है। एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि मिर्गी न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है। इसमें दिमाग के अंदर असामान्य तरंगें उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसी स्थिति में इंसान को बार-बार दौरा पड़ने लगता है। दिमाग और शरीर का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाता है। बेहोश होकर कुछ लोग जमीन पर गिर जाते हैं, कुछ लोग लड़खड़ाने लगते हैं। अगर समय पर इसका इलाज नहीं कराया गया तो ये बीमारी काफी खतरनाक साबित हो सकती है। मिर्गी के दौरे अक्सर प्रत्याशित और बिना वजह के पड़ते हैं। ब्रेन ट्यूमर, संक्रमण, स्ट्रोक, मस्तिष्क में घाव या चोट, ऑटोइम्यून रोग, विकासात्मक विकृतियों और अनुवांशिक प्रवृत्तियों के कारण मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं। मिर्गी के एमएमजी अस्पताल में हर महीने 700 से 800 मरीज और संयुक्त जिला अस्पताल में 400 से 500 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। फिजिशियन की ओपीडी से सीटी स्कैन जांच आदि कराने के बाद उन्हें उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉ. आलोक बताते हैं कि एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं, कीटोजेनिक डाइट और कुछ मरीजों में सर्जरी जैसी आधुनिक उपचार विधियां अत्यंत प्रभावी हैं। जूता-चप्पल ना सुंघाए संयुक्त जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राहुल वर्मा का कहना है कि मिर्गी का दौरा किसी भी उम्र में पड़ सकता है। लोगों में भ्रांति है कि मिर्गी का दौरा कुत्ते, चप्पल सुंघाने से ठीक हो जाता है, लेकिन परिजनों को मिर्गी को गंभीरता से लेना चाहिए। इनमें से कुछ मरीज ऐसे होते हैं, जो उम्र बढ़ने के साथ खुद ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ नियमित इलाज से ठीक हो जाते हैं। मिर्गी के दौरे पड़ने पर ये करें - मरीज को बायीं करवट लिटाएं - आसपास जगह खाली करें - कपड़े ढीले करें - मुंह में कुछ न डालें - झटकों को रोकने की कोशिश न करें दवा से सुधार हुआ दीनदयालपुरी निवासी 40 वर्षीय शख्स रास्ते में चलते हुए अचानक गिर पड़े और शरीर ऐंठना शुरू हो गया। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से उसे एमएमजी अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ इंजेक्शन और दवा से हालत में सुधार हुआ। वहीं, राजनगर निवासी 25 साल के युवक को अक्सर मिर्गी के दौरे पड़ते हैं। उसका निजी अस्पताल में में चल रहा है। युवक का कहना है कि उसे कभी भी दौरे पड़ जाते थे, लेकिन इलाज के बाद उसे लाभ हुआ है। बचाव - डॉक्टर की दवा नियमित रूप से खाएं - पर्याप्त नींद लेना जरूरी - नियमित व्यायाम करना चाहिए - तनाव और चिंता कम करें - संतुलित आहार खाएं - शराब और नशीली चीजों से दूर रहें - दिन में खूब पानी पिएं लक्षण - अस्थायी रूप से बेहोश हो जाना - मांसपेशियों में ऐंठन - अस्थायी रूप से भ्रम होना - सुन्न महसूस होना - बोलने या समझने में दिक्कत होना - दिल की धड़कन और श्वास की गति बढ़ जाना - भय, चिंता या दहशत महसूस करना। - हाथों और पैरों की गतिविधि में परिवर्तन