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कुत्तों के फीडिंग प्वाइंट बनाना आरडब्ल्यूए-एओए की जिम्मेदारीः  नगर निगम

कुत्तों के फीडिंग प्वाइंट बनाना आरडब्ल्यूए-एओए की जिम्मेदारीः नगर निगम

संक्षेप:

नगर निगम ने एक आरटीआई के जवाब में बताया कि निगम क्षेत्र में करीब 48 हजार लावारिस कुत्ते हैं। कुत्तों के लिए फीडिंग प्वाइंट बनाने की जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए और एओए की है। नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी के लिए अब तक 42 हजार कुत्तों का नसबंदी कार्य किया है।

Nov 29, 2025 04:51 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गाज़ियाबाद
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नगर निगम ने एक आरटीआई के जवाब में यह बात कही, निगम क्षेत्र में इस समय करीब 48 हजार लावारिस कुत्ते ट्रांस हिंडन, वरिष्ठ संवाददाता। कुत्तों के लिए फीडिंग प्वाइंट यानी खाना देने के स्थान चिह्नित करना नगर निगम की नहीं बल्कि आरडब्ल्यूए और एओए की जिम्मेदारी है। नगर निगम ने एक आरटीआई के जवाब में यह बात कही। नगर निगम क्षेत्र में करीब 48 हजार लावारिस कुत्ते हैं। लावारिस कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बड़े स्तर पर लोगों ने प्रदर्शन किया था। इसके बाद नगर निगम ने कुत्तों को ट्रैक करने के लिए चिप लगाने की बात कही थी।

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हालांकि, तीन साल पहले किए गए वादे ही अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। नगर निगम ने साल 2021 में सर्वे कराया था, जिसमें लावारिस कुत्ते 48 हजार पाए गए थे। चार साल में इनकी संख्या 25-30 फीसदी और बढ़ने का अनुमान है, क्योंकि दो माह पहले तक रोजाना सिर्फ 30 कुत्तों की ही नसबंदी हो पाती थी। नगर निगम गाजियाबाद ने अक्तूबर 2022 में पिटबुल, रॉटविलर और डोगो अर्जेंटीनो प्रजाति के कुत्तों को पालने पर पाबंदी लगाई थी। उसी समय कुत्तों के लिए फीडिंग प्वाइंट चिह्नित करने का भी फैसला हुआ था, लेकिन यह काम आज तक पूरा नहीं हो पाया है। इस वजह से कुत्ते हर जगह घूमते रहते हैं और लोगों को निशाना बनाते हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट प्रसून पंत ने इसी समस्या को लेकर आरटीआई लगाई थी। इस पर नगर निगम ने जवाब दिया है कि फीडिंग प्वाइंट बनाना संबंधित आरडब्ल्यूए और एओए की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही कहा गया है कि फीडिंग प्वाइंट न बनाए जाने पर लोग एनिमल वेलफेयर कमेटी को शिकायत कर सकते हैं। हर कुत्ते पर 1130 रुपये का खर्च एक कुत्ते की नसबंदी पर नगर निगम 1130 रुपये खर्च करता है। यह रकम नसबंदी के कार्य के लिए चयनित मैसर्स फ्रेंडिकोज सेका को दी जाती है। यह फर्म नगर निगम के दो एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर पर काम कर रही है। करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से तीसरा केंद्र भी बनाया जा रहा है। इसका काम पूरा होने के बाद रोजाना 160 कुत्तों की नसबंदी हो सकेगी। अभी रोजाना 70 कुत्तों की ही नसबंदी हो पा रही है। आरडब्ल्यूए-एओए निगम पर निर्भर आरडब्ल्यूए-एओए का कहना है कि फीडिंग प्वाइंट नगर निगम के हस्तक्षेप से ही बन सकते हैं। इसके लिए नगर निगम को कई बार पत्र दिया जा चुका है। उनके स्तर से कई बार प्रयास किया गया है, लेकिन पशु प्रेमी इसको लेकर विवाद करते हैं। फ्लैट ऑनर्स फेडरेशन के राजनगर एक्सटेंशन अध्यक्ष राजकुमार त्यागी का कहना है कि आरडब्ल्यूए-एओए इसके लिए प्रयास करके देख चुकी हैं। एओए फेडरेशन के अध्यक्ष दीपक कुमार का कहना है कि आम्रपाली विलेज सोसाइटी में फीडिंग प्वाइंट बने हैं। विंडसर पार्क में भी कुत्तों को घुमाने से लेकर खिलाने तक के अच्छे इंतजाम है। इसके लिए पशु प्रेमियों को विश्वास में लेकर सभी आरडब्ल्यूए व एओए को प्रयास करने चाहिए। अब तक 42 हजार की हो चुकी नसबंदी नगर निगम ने साल 2013 में कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू किया था। अब तक 42 हजार कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। मार्च 2023 तक 21,316 कुत्तों की नसबंदी हुई थी। वर्ष 2023-24 में 8,785 और वर्ष 2024-25 में 6,709 कुत्तों की नसबंदी की गई है। बीते साल संख्या घटी थी, लेकिन इस साल नसबंदी के आंकड़े बढ़ेंगे। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक अप्रैल से 28 नवंबर तक 5,554 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। -- फीडिंग प्वाइंट कॉलोनी और सोसाइटी में ही बनाए जा रहे हैं। कई जगह यह व्यवस्था चल रही है। यह आरडब्ल्यूए और एओए की ही जिम्मेदारी है। कहीं विवाद है तो शिकायत मिलने पर इसे दूर कराएंगे। - डॉ. अनुज कुमार सिंह, उप मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी, नगर निगम।