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शहर के युवाओं में मिल रहा मुंह का कैंसर

तंबाकू एवं धूम्रपान की लत युवाओं को कम उम्र में मुंह के कैंसर की चपेट में ले रही है। कैरियर की चिंता व जल्द कामयाबी पाने की होड़ में 25 से 30 साल का युवा तंबाकू व धूम्रपान का शिकार हो रहा है। इसका नतीजा यह है कि यहां पहले मुंह का कैंसर 40 वर्ष की उम्र के बाद दिखाई देता था वह अब 25 साल की उम्र में ही दिखाई देने लगा है। चिकित्सकों की मानें तो गाजियाबाद में रोजाना दस नए ऐसे मरीजों की पहचान हो रही है जिनकी उम्र 25 से 30 साल की बीच की है।

नाक, कान गला विशेषज्ञ डॉ. बीपी त्यागी ने बताया कि बच्चों ने कम उम्र में धूम्रपान का सेवन शुरू कर दिया है। ऐसे में तंबाकू में रसायनिक पदार्थों से डीएनए में बदलाव होने लगता है। इससे कैंसर होने का खतरा बढता है। शुरू में मुंह में छाले और गांठ बनती है, जो बाद में कैंसर का रूप लेती है। हालांकि पहले मुंह का कैंसर 40 वर्ष की उम्र में मिलता था, लेकिन अब 25 वर्ष में मुंह के कैंसर के रोगी मिल रहे हैं।

श्री जगन्नाथ धर्मार्थ कैंसर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 30 मरीज आते हैं। इसमें चार से पांच मरीज 25 से 30 साल के होते हैं। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. राशि अग्रवाल के मुताबिक तंबाकू-सिगरेट में निकोटीन और टार पाया जाता है। इससे फेफड़े को काफी नुकसान होता है। इसके अलावा इनमें कई केमिकल जैस एसिटोन, अमोनिया, कार्बन-मोनो-ऑक्साइड, मिथेन, पेंजोपाएटिन भी होते हैं जो कई बीमारियों का कारण बनते हैं। इसके कारण मुख कैंसर, फेफड़ा रोग और कैंसर, हृदय रोग और हार्ट अटैक जैसी समस्याएं आती हैं। महिलाओं में यूट्रस कैंसर की बड़ी वजह धूम्रपान सेवन व तंबाकू खाना हैं।

धूम्रपान से गर्भ में पल रहे बच्चे को खतरा

गर्भवती महिलाओं का धूम्रपान करने वालों के संपर्क में रहने से खतरा रहता है। ऐसे में लगातार धुएं के संपर्क में रहने से नवजात शिशु में वजन कम हो जाता है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. दीपा त्यागी के मुताबिक गर्भवती महिलाओं के धूम्रपान करने से नवजात पर काफी प्रभाव पड़ता है। इसमें नवजात शिशु का वजन कम रहने के साथ मौत का खतरा भी रहता है।

शहर में कैंसर मरीजों की स्थिति

इलाज की व्यवस्था पांच सेंटर

रोजाना ओपीडी में मरीज 100 से ज्यादा

25 से 30 साल की उम्र वाले मरीज 20 से ज्यादा

30 से 40 तक की उम्र वाले मरीज 30 से ज्यादा

50 से अधिक उम्र वाले वाले मरीज 50 से ज्यादा

तंबाकू के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियां

तंबाकू खाने या धूम्रपान से हृदयाघात, स्ट्रोक, फेफड़ों में संक्रामक (क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, एम्फिसीमा) और कैंसर, लेरिनजेल कैंसर, ओरल कैंसर, पेट के कैंसर, ओईओफोजेल कैंसर, मूत्राशय के कैंसर व अग्नाश्य कैंसर होते है। तंबाकू के इस्तेमाल से उच्च रक्तचाप और पेरिफेरल वेस्कुलर डिजीज भी हो सकती हैं।

तंबाकू व धूम्रपान छोड़ने पर आने वाली दिक्कत

चक्कर आना (छोड़ने के बाद 1 से 2 दिन तक रह सकते हैं), हताशा, क्रोध का अनुभव, चिंता, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, नींद में बने रहने में परेशानी, बुरे या डरावने सपने आना, ध्यान केंद्रित न होना, बेचैनी व सिरदर्द, थकान, बहुत भूख लगना, वजन बढ़ना, कब्ज या गैस, खांसी, मुंह सूखना, गला सूखना, सीने में कसाव, हृदय गति धीमी होना।

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  • Web Title:Mouth cancer found in the youth of the city