
विश्व अंगदान दिवस : जिले में डोनर बैंक नहीं पर 155 लोगों ने अंगदान को संकल्प पत्र भरा
गाजियाबाद में पिछले एक साल में 155 लोगों ने अंगदान के लिए संकल्प पत्र भरा है, लेकिन सरकारी स्तर पर डोनर बैंक की व्यवस्था नहीं है। मरीजों को अंगदान के लिए दिल्ली जाना पड़ रहा है। नेत्र और किडनी रोगियों...
गाजियाबाद। पिछले एक साल में 155 लोगों ने अंगदान के लिए संकल्प पत्र भरा है। लेकिन सरकारी स्तर पर डोनर बैंक की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते जिले के लोगों को अपने परिजनों के अंगदान के लिए दिल्ली जाना पड़ रहा है। जिले में मरीजों के आंकड़े बताते है कि अंगदान की सबसे ज्यादा जरूरत नेत्र और किडनी के रोगियों को है। विश्व अंगदान दिवस हर साल 13 अगस्त को मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को अंगदान के महत्व को समझाना और लोगों को अंग दान के बारे में शिक्षित करना है। इस कार्य में सबसे ज्यादा बढ़-चढ़कर काम करने वाली संस्था दधीचि देहदान समिति है।
सरकारी स्तर पर अंगदान की कोई व्यवस्था नहीं हैं। जिले में ना ही कोई डोनर बैंक है। जिसमें आम आदमी अपनी स्वैच्छा से अंगदान करने के लिए कागजात जमा कर सके। दधीचि देहदान समिति के मंडल समन्वयक वीके अग्रवाल बताते है कि जिले में अब तक दो हजार से ज्यादा लोगों ने अंगदान और नेत्र दान के लिए संकल्प लिया है। इनमें से अंगदान करने वालों की इच्छा के मुताबिक परिजनों ने 250 लोगों का सकंल्प पूरा किया है। 200 नेत्रदान करने वाले और 50 देहदान करने वाले शामिल हैं। पिछले साल 155 लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया। वीके अग्रवाल ने बताया कि अंगदान के लिए 24 घंटे के अंदर परिजनों को उनकी संस्था को सूचना देनी होती है। संस्था की ओर से चिकित्सकों की टीम मृतक के घर पहुंचती है और अगर देह दान की है तो शरीर को लेकर वापस आ जाती है। अगर नेत्र दान किया है तो ऑपरेशन से आंखे लेने के बाद मृतक के शरीर में पत्थर की आंख लगा देती है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था केवल नेत्र और देहदान को लेकर लोगों को संकल्पिक कराती है। जिले में डायलिसिसि के बढ़ रहे मरीज अध्ययन के मुताबिक 10 लाख लोगों में से 800 को क्रॉनिक किडनी रोग होता है। जिले में सरकारी स्तर पर संजयनगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल में ही डायलिसिस की सुविधा है। फिलहाल यहां 150 मरीजों का डायलिसिस चल रही है और 15 से ज्यादा मरीज वेटिंग हैं। इसी तरह निजी अस्पतालों में एक हजार से ज्यादा मरीजों की डायलिसिस चल रही है और इन्हें किडनी ट्रासप्लांट की जरूरत है। दो प्रतिशत लोगों को नेत्रदान की जरूरत जिले के सरकारी अस्पतालों में हर साल 35 हजार से ज्यादा मोतिबिंद के ऑपरेशन होते है। अस्पतालों की ओपीडी दो प्रतिशत मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें आंखों से दिखाई नहीं देता और उनकी रोशनी तभी आ सकती है, जब उन्हें नेत्रदान हो जाए। वरिष्ठ नेत्र सर्जन डा. नरेंद्र कुमार ने बताया कि रेटिना खराब होने के बाद केवल नेत्रदान से ही आंखों की रोशनी आना संभव है। जिले में कोई आई बैंक या डोनर बैंक का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। ताकि जिले में भी इस दिशा में बुनियादी ढांचा तैयार हो सके। - डा. अखिलेश मोहन, सीएमओ, गाजियाबाद

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