रोमांच के बजाय दहशत में बीतीं छुट्टियां

Mar 11, 2026 09:18 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गाज़ियाबाद
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दुबई में फंसे चिकित्सक डॉ. विजय पांडेय ने पत्नी और दो बेटियों के साथ अपनी भयावह यात्रा का अनुभव साझा किया। 25 फरवरी को छुट्टी पर गए थे, लेकिन 28 फरवरी को स्थिति तनावपूर्ण हो गई। छह दिन शेल्टर में बिताने के बाद, उन्हें चार लाख रुपये देकर भारत लौटने की फ्लाइट मिली। वतन लौटने पर उन्होंने राहत की सांस ली।

रोमांच के बजाय दहशत में बीतीं छुट्टियां

-दुबई में फंसे चिकित्सक परिवार के साथ वतन लौटे ट्रांस हिंडन, संवाददाता। खुशी और रोमांच का एहसास करने के लिए दुबई गए परिवार की छुट्टियां दहशत में बीतीं। घूमने के बजाय शेल्टर में कैद रहना पड़ा। वसुंधरा में रहने वाले चिकित्सक ने दुबई से लौटकर अपनी दास्तान बयान की। वह पत्नी व दो बेटियों के साथ 25 फरवरी को दुबई रवाना हुए थे। उनके मुताबिक वहां का अनुभव काफी डरावना रहा। घर लौटने पर राहत की सांस मिली है।वसुंधरा निवासी 55 वर्षीय डॉ. विजय पांडेय वैशाली के मैक्स अस्पताल में रोबोटिक सर्जन हैं। वह 25 फरवरी को दुबई घूमने गए थे।

उनके साथ उनकी पत्नी डॉ. रचना पांडेय और दो बेटियां शुभांशी पांडेय और अश्लेषा पांडेय भी थीं। एक सप्ताह में उन्हें लौटना था। डॉ. विजय के मुताबिक कुछ दिन छुट्टियां मौज-मस्ती में बिताने के बाद 28 फरवरी अचानक तनावपूर्ण स्थिति हो गई। माहौल दहशत वाला हो गया और उड़ानें रद्द हो गईं। डॉ. पांडेय ने बताया कि परिवार के साथ यादगार पल बिताने की उम्मीद लिए वह दुबई के लिए रवाना हुए थे, लेकिन छह दिन तक शेल्टर में कैद होकर रहना पड़ा। आसमान में घूमते लडाकू विमान और मिसाइलों को फटते देख दहशत अंदर तक बैठ चुकी थी। पत्नी और बेटियों की चिंता सता रही थी। बच्चों की उत्सुकता भी धीरे-धीरे चिंता में बदल गई। माता-पिता ने खुद को संभालते हुए बच्चों को सहारा दिया और डटकर परिस्थितियों का सामना किया। डॉ. पांडेय का आरोप है कि भारत सरकार द्वारा उन्हें वापस लाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने कई बार एयरलाइंस से संपर्क किया और लगातार प्रयास करते रहे। अंत में चार लाख रुपये से अधिक भुगतान करने के बाद फ्लाइट में सीट सुनिश्चित हो सकी। वह छह मार्च को भारत लौट आए थे। वतन लौटने के बाद घर की खुशबू, पड़ोसियों का स्वागत और सुरक्षित माहौल ने उनके मन को सुकून दिया, लेकिन अभी तक दुबई की इस दहशत भरी यात्रा के पल डरा रहे हैं। डॉ. पांडेय ने कहा कि इससे जीवन का सबक भी मिला है। किसी भी कठिन परिस्थिति में धैर्य और संयम बनाए रखना चाहिए।

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