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प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना 2.0 में सातवें स्थान पर पहुंचा गाजियाबाद

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) 2.0 के तहत जिले में अब तक 17353 लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया है। इसमें जिला लक्ष्य के सापेक्ष 83.8...

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना 2.0 में सातवें स्थान पर पहुंचा गाजियाबाद
हिन्दुस्तान टीम,गाज़ियाबादTue, 20 Feb 2024 06:45 PM
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गाजियाबाद। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) 2.0 के तहत जिले में अब तक 17353 लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया है। इसमें जिला लक्ष्य के सापेक्ष 83.8 प्रतिशत कवरेज के साथ सूबे में सातवें स्थान पर रहा है। पहली बार मां बनने पर योजना का लाभ दिया जाता है। दूसरी संतान के रूप में बालिका को जन्म देने को माताएं भी योजना का लाभ मिलता है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में गर्भधारण से 570 दिन के अन्दर पंजीकरण किया जा सकता है। पहली बार मां बनने वाली गर्भवती को दो किश्त में भुगतान किया जाता है। प्रथम किश्त 3000 रुपये एवं द्वितीय किश्त 2000 रुपए लाभार्थी को बैंक खाते में भेजी जाती है। दूसरी संतान बालिका होने पर धनराशि 6000 रुपए एकमुश्त दी जाती है। इसमें शिशु के जन्म से 270 दिन के अन्दर पंजीकरण किया जा सकता है। इसी योजना के तहत सीएमओ डा. भवतोष शंखधर ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा लाभार्थियों का पंजीकरण करने के लिए चार विशेष पंजीकरण अभियान में सितंबर-2023 से अब तक पीएमएमवीवाई-2.0 के अंतर्गत 17, 353 लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया है। पहला अभियान 30 नवम्बर से एक दिसम्बर तक चलाया गया था। इसके बाद में आठ दिसम्बर तक के लिए बढ़ा दिया गया था। इसके बाद दूसरा अभियान 18 से 22 दिसम्बर तक चला। तीसरा अभियान दो जनवरी से 16 जनवरी तक चला। चौथा अभियान 29 जनवरी से 15 फरवरी तक चला।

शहरी क्षेत्र में सबसे ज्यादा लाभार्थी

सितंबर-2023 से अब तक डासना में 705, लोनी में 826, भोजपुर में 638, मुरादनगर में 649 और शहरी क्षेत्र में कुल 14,535 लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें पहली बार मां बनने और दूसरी बार बालिका को जन्म देने वाली लाभार्थी शामिल हैं। एक अप्रैल, 2021 से जनवरी-2024 तक जिले में कुल पंजीकरण 75,777 हुए। जो लक्ष्य के सापेक्ष 125 प्रतिशत रहे।

एएनएम और आशा से लें मदद

जिला कार्यक्रम प्रबंधक अनुराग भारती ने बताया कि योजना के अंतर्गत पंजीकरण कराने के लिए नगरीय स्वास्थ्य इकाइयों पर एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं से संपर्क किया जा सकता है। जबकि ग्रामीण स्वास्थ्य इकाइयों पर ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम), ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम), एमसीटीएस ऑपरेटर, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं से संपर्क किया जा सकता है।

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