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जनशिकायतों के निस्तारण में गाजियाबाद पुलिस को पहला स्थान

जनशिकायतों के निस्तारण में गाजियाबाद पुलिस को पहला स्थान

संक्षेप:

गाजियाबाद कमिश्नरेट के 19 थाने नवंबर माह में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में प्रदेश में पहले स्थान पर रहे। 93.28 प्रतिशत शिकायतकर्ताओं ने संतोषजनक फीडबैक दिया। पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड़ ने बताया कि सभी शिकायतों का निस्तारण समय से पहले किया गया और नई नीतियों से पुलिस पर भरोसा बढ़ा है।

Dec 09, 2025 06:37 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गाज़ियाबाद
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गाजियाबाद। नवंबर माह में आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायतों के निस्तारण में कमिश्नरेट के 19 थाने प्रदेश में अव्वल रहे हैं। रैंकिंग के मुताबिक 93.28 प्रतिशत शिकायतकर्ता शासन द्वारा लिए गए फीडबैक में संतुष्ट मिले। अधिकारियों का कहना है कि फीडबैक आधारित जन संवाद नीति व जनहितकारी अभियानों से लोगों का पुलिस पर भरोसा बढ़ा है। गाजियाबाद कमिश्नरेट में साइबर थाना, महिला थाना और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाने को छोड़कर 24 थाने हैं, जिनकी शासन स्तर से समीक्षा होती है। इनमें से 19 थाने जनशिकायतों के निस्तारण में प्रदेश में पहले स्थान पर आए हैं। आईजीआरएस रैंकिंग में पुलिस के बेहतर प्रदर्शन पर पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड़ का कहना है कि नवंबर माह में आईजीआरएस पर दर्ज कुल 476 मामलों में से 444 शिकायतकर्ताओं ने संतोषजनक फीडबैक दिया, जबकि केवल 32 ने असंतोष व्यक्त किया।

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पुलिस आयुक्त के अनुसार सभी शिकायतों का निस्तारण तय समय से पहले किया गया, जिसके चलते एक भी केस डिफॉल्टर की श्रेणी में नहीं गया। मुख्यमंत्री कार्यालय से जिन 11 मामलों की गुणवत्ता जांच कराई गई, वे सभी उत्कृष्ट पाए गए। इससे स्पष्ट है कि कमिश्नरेट स्तर पर शिकायतों को गंभीरता से लेकर निस्तारण की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। यह नीतियां असरकारक साबित हुईं वादी संवाद नीति : पुलिस आयुक्त कहना है कि पिछले कुछ महीनों में पुलिसिंग को जन-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से कई नई नीतियां लागू की गईं, जिनका सीधा असर अब जिलावासियों को मिलने वाली सेवाओं में दिखाई दे रहा है। वादी संवाद नीति के तहत प्रत्येक बुधवार को थानों में पीड़ितों से सीधे संवाद की व्यवस्था लागू की गई, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके। यह पहल पुलिस और वादी के बीच की दूरी कम करने में प्रभावी साबित हुई है, साथ ही शिकायत निस्तारण में भी पारदर्शिता आई है। शिष्टाचार संवाद नीति : इस नीति के तहत थानों और चौकियों में आने वाले फरियादियों के साथ सौम्य और सम्मानजनक व्यवहार को अनिवार्य किया गया। अफसरों और बीट पुलिस को लोगों के बीच जाकर संवाद बढ़ाने के निर्देश दिए गए। वर्षों से अपराध में लिप्त और जमानत पर चल रहे अपराधियों को भी थानों पर तलब कर उनसे बातचीत की गई, जिससे अपराध नियंत्रण में बेहतर परिणाम दिखाई दिए और जनता का भरोसा बढ़ा। सिटीजन चार्टर : बीते अप्रैल माह में लागू किए गए सिटीजन चार्टर लागू किया गया। जिसके तहत एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी अब वादी के घर तक पहुंचाई जा रही है। फीडबैक सेल बनाकर पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर नजर रखी जा रही है और नकारात्मक फीडबैक मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जनशिकायतों के निस्तारण ने लोगों को राहत दी है और पुलिस की सुलभता बढ़ाई है। कमिश्नरेट में लागू की गई फीडबैक आधारित जन संवाद नीति व जनहितकारी अभियानों से ही जनता का भरोसा पुलिस पर बढ़ा है। यह उपलब्धि गाजियाबाद पुलिस की जनसेवा, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आईजीआरएस रैंकिंग में और अधिक सुधार कराने की दिशा में प्रभावी रूप से काम किया जा रहा है।– जे. रविंदर गौड़, पुलिस आयुक्त