
बहन-बहनोई पर करोड़ों की धोखाधड़ी का केस
राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले नरेश शर्मा ने अपनी बहन बबली और बहनोई मनोज शर्मा पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश पर नंदग्राम थाने में केस दर्ज कराया गया है। नरेश ने कहा कि पारिवारिक विवाद के चलते उनकी मां ने अपार्टमेंट की वसीयत बदल दी और रकम लौटाने से इनकार किया।
राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले व्यक्ति का आरोप कोर्ट के आदेश पर नंदग्राम थाने में मुकदमा दर्ज गाजियाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले व्यक्ति ने दिल्ली निवासी बहन-बहनोई पर करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने कोर्ट के आदेश पर नंदग्राम थाने में केस दर्ज कराया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। राजनगर एक्सटेंशन के वीवीआईपी एड्रेसेज स्टाइल मॉल निवासी 55 वर्षीय नरेश शर्मा ने नांगलोई पश्चिमी दिल्ली के अशोक मोहल्ला निवासी अपनी बहन बबली शर्मा और बहनोई मनोज कुमार शर्मा के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर नंदग्राम थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है।
नरेश शर्मा के मुताबिक पारिवारिक बंटवारे के दौरान उनकी माता संतोष शर्मा ने उन्हें 16 लाख रुपये कम दिए थे और भरोसा दिलाया था कि बाद में यह रकम उन्हें लौटा दी जाएगी। इसी भरोसे पर उन्होंने अपने हिस्से की यह रकम अपनी मां द्वारा राजनगर एक्सटेंशन स्थित वीवीआईपी सूट्स में खरीदे गए अपार्टमेंट में लगवा दिए। नरेश का कहना है कि उनकी माता ने 31 अगस्त 2018 को अपार्टमेंट की वसीयत और मुख्तारनामा उनके नाम कर भी दिया था। लेकिन वर्ष 2019 में उनकी बहन बबली शर्मा और बहनोई मनोज कुमार शर्मा ने बहला-फुसलाकर उनकी मां को अपने प्रभाव में ले लिया और षड्यंत्र के तहत उनके पक्ष में बनी वसीयत और मुख्तारनामा को निरस्त करवा दिया। इसके बाद दोनों ने एक अक्तूबर 2019 को अपार्टमेंट अपने नाम गिफ्ट डीड करा ली। नरेश शर्मा के मुताबिक जानकारी लगने पर उन्होंने विरोध जताया तो बहन और बहनोई ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे उनके 16 लाख रुपये लौटा देंगे। भरोसा करते हुए उन्हें कोई आपत्ति नहीं की, लेकिन बाद में कई बार मांग करने के बावजूद न तो रकम लौटाई गई और न ही कोई समाधान निकाला गया। उल्टे बहन-बहनोई ने उन्हें और उनके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भिजवाने की धमकी देनी शुरू कर दी। नरेश शर्मा का आरोप है कि वर्ष 2024 में राजनगर स्थित उनकी माता के एक अन्य मकान को भी बहन-बहनोई ने अपने नाम कराकर डेढ़ करोड़ रुपये में किसी अन्य को बेच दिया, जबकि उसकी कीमत छह से सात करोड़ रुपये है। आरोप है कि उन्होंने पूरे प्रकरण की शिकायत नंदग्राम थाने, पुलिस आयुक्त कार्यालय और जिलाधिकारी को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे बाद उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। एसीपी नंदग्राम उपासना पांडेय का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर शिकायतकर्ता के बहन-बहनोई के खिलाफ 11 दिसंबर को नंदग्राम थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच कर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

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