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लूट के लिए इंजीनियर अंकित की हुई थी हत्या

खुलासा -इंजीनियर ने दोस्तों के साथ मिलकर फॉर्च्यूनर लूटने के लिए गोली मारी थी -सीबीआई और एसटीएफ ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर राज खोला -वारदात में इस्तेमाल की गई होंडा एकॉर्ड कार बरामद हुई -अनिल दुजाना गैंग के सत्ते उर्फ लोकेश भाटी ने कार लूटने का काम दिया था मेरठ निवासी अंकित चौहान पत्नी के साथ नोएडा की सेक्टर-76 में प्रतीक विस्टीरिया में रहते थे। अंकित चौहान खुद टीसीएस सेक्टर-62 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। उनकी पत्नी अमीषा सेक्टर-135 में आईटी कंपनी एसेंचर में काम करती थीं। 13 अप्रैल 2015 को अंकित चौहान अपने दोस्त गगन के साथ पत्नी से उनकी कंपनी में मिलकर फॉर्च्यूनर गाड़ी से वापस सेक्टर-76 घर लौट रहे थे। जब वह सेक्टर-71 के पास पहुंचे तो होंडा एकॉर्ड कार में सवार बदमाशों ने उन पर गोलियां चलाई थीं। इस दौरान अंकित की मौत हो गई थी। नोएडा पुलिस उस समय इस मामले का खुलासा करने में नाकाम रही थी। इसके कारण यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 26 अप्रैल 2016 को सीबीआई को सौंप दिया था। सीबीआई ने यूपी एसटीएफ से इस मामले में सहयोग का अनुरोध किया था। कर्ज चुकाने के लिए लूट की साजिश रची थी ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार को यूपी एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि गाजियाबाद की एडवोकेट कॉलोनी (प्रताप विहार) का रहने वाला इंजीनियर शशांक जादौन पुत्र शिवपाल सिंह संपत्ति की खरीद-फरोख्त का काम करता था। इसी दौरान शशांक की दोस्ती पंकज पुत्र श्रीपाल से हुई। पंकज आपराधिक प्रवृत्ति का था। शशांक ने पंकज से चार लाख रुपये उधार लिए थे। कारोबार नहीं चलने के कारण शशांक रुपये नहीं लौटा पा रहा था। इस पर पंकज ने बताया कि निजामपुर गांव, सिकंदराबाद, बुलंदशहर के रहने वाले सत्ते उर्फ लोकेश भाटी को एक फॉर्च्यूनर कार की जरूरत है। अगर उसे कार दे दी जाए तो वह आठ-नौ लाख रुपये दे सकता है। तीन लोगों ने मिलकर बनाई योजना इन दोनों ने सर्वोदय नगर (गाजियाबाद) के कार मैकेनिक मनोज पुत्र दौलतराम से संपर्क किया। दोनों शशांक की होंडा एकॉर्ड कार में सवार होकर 13 अप्रैल 2015 को मनोज के पास पहुंचे। पंकज ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर और एक अवैध पिस्टल साथ रख ली। तीनों लोग ग्रेटर नोएडा आए और परी चौक से ग्रेटर नोएडा की ओर सर्विस रोड पर फॉर्च्यूनर कार तलाशने लगे। कई घंटे ढूंढ़ने पर कोई कार नहीं दिखाई दी। ये लोग घूमते-फिरते नोएडा सेक्टर-135 में एक्सेंचर कंपनी तक पहुंच गए। वहां इनके सामने एक सफेद रंग की नई फॉर्च्यूनर कार आकर रुकी जिसमें से दो लड़के उतरकर कंपनी में ऊपर गए तभी इन तीनों ने यह कार लूटने की योजना बना ली। इस तरह वारदात को अंजाम दिया शशांक अपनी कार से उतरकर चाय की दुकान पर खड़ा हो गया। गाड़ी पंकज चला रहा था और मनोज पीछे बैठा था। किसी को शक नहीं हो इसलिए कार को इधर-उधर लेकर घूमने लगे। थोड़ी देर बाद अंकित चौहान और उसका दोस्त गगन बाहर आए और फॉर्च्यूनर कार लेकर नोएडा की ओर चल दिए। इस पर ये तीनों उनका पीछा करने लगे। बरौला बाईपास रोड (सेक्टर 76) के पास फॉर्च्यूनर कार को ओवरटेक करके तीनों ने अपनी कार उनके सामने लगा दी। शशांक, पंकज की रिवॉल्वर लेकर नीचे उतरा और अंकित को कार से बाहर आने को कहा लेकिन अंकित कार को बैक करके वापस चलने लगा। इस पर शशांक ने गोली चला दी। अंकित का दोस्त गगन नीचे की ओर छिप गया। शशांक और मनोज ने अंकित को कार से नीचे गिराने की कोशिश की लेकिन सीट बेल्ट लगी होने के कारण उसको नहीं गिरा पाए। हड़बड़ाहट के कारण इन तीनों ने यू-टर्न लिया और ग्रेटर नोएडा की ओर वापस भाग गए। एकॉर्ड गाड़ी की नंबर प्लेट बदल कर वारदात को अंजाम दिया गया था। एसटीएफ एकार्ड गाड़ी की तलाश करते हुए आरोपियों तक पहुंची है। नोएडा पुलिस की किरकिरी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकित चौहान की हत्या का मामला काफी गरमाया था। पुलिस को काफी तलाश के बाद भी बदमाशों का सुराग नहीं मिला था। इसके चलते नोएडा पुलिस की इस मामले में काफी किरकिरी हुई थी। परिजनों ने मुख्यमंत्री और सीबीआई से गुहार लगाई थी अंकित चौहान के परिजनों ने इस मामले का खुलासा करने और आरोपियों को पकड़ने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री और सीबीआई जांच की गुहार लगाई थी। उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। 14 जून 2016 को सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। मेरठ तक चली पूछताछ सीबीआई ने जांच मिलने के बाद से नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ तथा मुजफ्फरनगर के लोगों से पूछताछ की थी। इनमें अंकित के मित्र, परिजन, अंकित की ससुराल पक्ष के लोग, पत्नी, नोएडा तथा मेरठ के कई संदिग्ध शामिल थे। सीबीआई हत्याकांड में लूट के इरादे तथा रंजिशन दोनों थ्योरी पर काम कर रही थी।

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  • Web Title:Engineer Ankit was murdered for robbery