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बेटा पैदा न होने पर शादी के आठ साल बाद महिला को घर से निकाला

-सरकारी अस्पताल में डायलसिस पर है महिला -महिला की सात साल की बेटी है-सुनवाई में पति ने मानी गलती कहा घर वालों के बहकावे में किया-महिला ने ससुराल जाने से किया इंकारगाजियाबाद। संवाददातामहिला थाने में परिवार परामर्श केंद्र पर शनिवार को हुई सुनवाई में एक मामले में एक बीमार महिला को बेटा पैदा न होने पर घर से निकाल दिया। महिला सरकारी अस्पताल में डायलसिस पर हैं। महिला की शादी आठ साल पहले हुई थी। इससे एक सात साल की बेटी भी है। सुनवाई में पति ने गलती मानते हुए कहा कि वह घरवालों के बहकावे में आ गया था और पत्नी को घर ले जाना चाहता है, लेकिन महिला ने पति के साथ घर जाने से इंकार कर दिया। हेमंत और सविता (दोनों बदले हुए नाम) की शादी आठ साल पहले हुई थी। शादी के एक साल बाद ही महिला के बेटी पैदा हो गई। बेटी पैदा होने पर ससुराल वालों ने महिला को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। ससुराल वालों को अपने घर का वारिस चाहिए था। कुछ दिन बाद ही महिला बीमार रहने लगी। डॉक्टर को दिखाने पर पता चला कि महिला की एक किडनी फेल हो चुकी है। दूसरी किडनी भी कभी भी काम करना बंद कर सकती है। कुछ दिन महिला का इलाज निजी अस्पताल में कराया, लेकिन खर्चा ज्यादा होने की वजह से सरकारी अस्पताल से इलाज कराना शुरू कर दिया। हालत गंभीर होने पर ससुराल वालों की महिला से बेटा होने की उम्मीद खत्म होने लगी। बेटे के नाम पर हर रोज उसे परेशान किया जाने लगा। रक्षाबंधन पर ससुराल वालों ने राखी बांधने के बहाने महिला से कहा कि वह अपने मायके चली जाए, लेकिन वहां जाने के बाद उससे मना कर दिया गया कि अब वह किसी काम की नहीं है। वह वापस ससुराल न आए। उन्हें बेटा चाहिए उसे बेटा पैदा नही हो सकता। कुछ दिन सब सही होने का इंतजार किया, लेकिन जब उसे ससुराल में नहीं बुलाया गया तो मामला महिला थाने पहुंच गया। थाने में शिकायत महिला ने ही की थी। मामले पर परिवार परामर्श केंद्र पर तीन सुनवाई हो चुकी हैं, चौथी सुनवाई में काउंसलिंग के दौरान पति ने स्वीकार किया कि उसकी गलती थी। बीमार हालत में उसे अपनी पत्नी को नहीं छोड़ना चाहिए था। उसने माना कि वह घरवालों के बहकावे में आ गया था, लेकिन महिला ने पति के साथ ससुराल जाने से इंकार कर दिया। महिला ने कहा कि वह अब उस घर में नहीं जा सकती जहां किसी को उसकी जिंदगी की परवाह नहीं है। काउंसलर ने बताया कि मामले को अगली तारीख दे दी है। वह सरकारी अस्पताल में डायलसिस पर है जिससे उसे आने जाने में परेशानी होती है। इस वजह से उसे अगले महीने की 11 तारीख दे दी है। दो दंपतियों को समझाकर घर भेजापरिवार परामर्श केंद्र पर शनिवार को हुई सुनवाई में दो जोड़ों को समझकर घर भेज दिया गया। केद्र पर कुल 53 मामलों की सुनवाई की गई। इनमें से पांच फाइलें केंद्र की ओर से बंद कर दी गई हैं। बाकी मामलों को सहूलियत के हिसाब से काउंसलर्स ने अगली तारीख दे दी है। रुढ़िवादी परिवारों में आज भी होती है बेटे की चाह काउंसलर आफताब नाज ने बताया कि आज भी समाज में ऐसे क ई परिवार हैं। जिन्हें बेटा सिर्फ बेटा चाहिए होता है। केंद्र पर इस तरह के कई मामले आते हैं। आज भी ऐसे रुढ़िवादी परिवार हैं जहां महिलाओं को बेटी पैदा होने पर परेशान किया जाता है, जबकि अब समय बदल चुका है बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं। बेटा-बेटी में भेद भाव किया जाना गलत है।

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  • Web Title:Eight years after the marriage the woman was taken out of the house when the son was not born