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फर्जी कागजातों से नौकरी पाने वाले आठ डाककर्मी दोषी

- मुरादाबाद में वर्ष 1992-1993 में भर्ती फर्जीवाड़ा

- डाक सहायकों के फर्जीवाड़ा में सीबीआई जांच हुई

सीबीआई की विशेष अदालत ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर डाक सहायक की नौकरी पाने वाले आठ कर्मचारियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने मार्कशीट की बगैर जांच कराए सत्यापन करने वाले तत्कालीन डाक सहायक को दोषी करार दिया है। अदालत ने सजा पर फैसले के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की है।

सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश राजेशचौधरी की अदालत ने पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर मंगलवार को नौ अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया। मुरादाबाद में वर्ष 1992-93 में डाक विभाग में भर्ती में यह फर्जीवाड़ा हुआ था। सीबीआई के लोक अभियोजक एससी मीना ने बताया कि मुरादाबाद डाक विभाग में तब बद्री प्रसाद डाक सहायक के पद पर तैनात थे। डाक सहायक की भर्ती निकलने पर धर्मवीर सिंह, राज बहादुर दोनों निवासी हाथरस, वीरेंद्र उर्फ प्रेम सिंह निवासी अनूपशहर, सत्यपाल सिंह उर्फ सुभाष चंद निवासी मैनपुरी, महेश सिंह उर्फ इंदल सिंह, सुंदर लाल निवासी एटा, रोशन लाल उर्फ सियाराम, मैनपुरी, सुरेंद्र सिंह निवासी अलीगढ़ एवं हरिपाल सिंह, एटा ने डाक सहायक पद पर भर्ती के लिए आवेदन किया। आवेदनकर्ताओं ने आवेदन के साथ फर्जी मार्कशीट लगा दी थी। भर्ती प्रभारी बद्री प्रसाद ने दस्तावेजों का सत्यापन कराए बगैर सभी को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए।

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  • Web Title:Eight postman accused of getting job from fake papers