मुनाफे का झांसा देकर साढ़े 31 लाख ठगे
गाजियाबाद में एक सेवानिवृत्त फौजी दान सिंह नेगी ने शेयर ट्रेडिंग के नाम पर साइबर अपराधियों से 31.54 लाख रुपये ठगाए। उन्होंने फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा और निवेश के लिए व्हाट्सऐप द्वारा संपर्क किया गया। निवेश के नाम पर कई बार पैसे ट्रांसफर कराए गए, लेकिन अंततः ठगी का एहसास हुआ।

गाजियाबाद, योगेन्द्र सागर। साइबर अपराधियों ने शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर सेवानिवृत्त फौजी से साढ़े 31.54 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडब्ल्यू सृष्टि अपार्टमेंट निवासी दान सिंह नेगी ने साइबर थाने में दी शिकायत में बताया कि वह सेना से सेवानिवृत्त हैं। कुछ समय पहले उन्होंने फेसबुक पर शेयर ट्रेडिंग से संबंधित एक विज्ञापन देखा, जो यूनाइटेड किंगडम आधारित कंपनी का था। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद उनसे व्हाट्सऐप नंबरों के जरिए संपर्क किया गया। आरोपियों ने खुद को विदेशी निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश से भारी मुनाफा होने का दावा किया।
पीड़ित के अनुसार आरोपियों ने उन्हें एक ऐप का लिंक भेजा। उन्होंने 23 सितंबर 2025 को एप पर प्रोफाइल बनाई। इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में निवेश के नाम पर रुपये ट्रांसफर कराने शुरू कर दिए। शुरुआत में उन्हें ऐप पर लाभ दिखाया गया, जिससे उनका भरोसा बढ़ता गया।दान सिंह नेगी के मुताबिक निवेश की रकम निकालने का प्रयास किया तो ठगों ने कहा कि पहले सीजीटी टैक्स जमा करना होगा। इसके बाद उन्होंने 2.66 लाख रुपये जमा करा दिए। फिर फंड सुरक्षित रखने के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर 3.12 लाख रुपये वसूले गए। इसके बाद सेबी पेनल्टी, दस्तावेज जांच, एफसीए सर्टिफिकेशन और क्रिप्टो करेंसी टैक्स के नाम पर लगातार लाखों रुपये ट्रांसफर कराए जाते रहे। आरोपियों ने दावा किया कि उनका फंड यूके से भारत भेज दिया गया है और अब एचएसबीसी बैंक की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए प्रोसेसिंग फीस के नाम पर नौ लाख और जमा करा लिए गए। इसके बाद भी रकम जारी नहीं हुई। पीड़ित ने दबाव बनाया तो आरोपियों ने कहा कि मिस्टर पटेल के हस्ताक्षर के बाद ही भुगतान होगा और इसके लिए 10 लाख रुपये और देने होंगे।पीड़ित के मुताबिक उन्होंने आर्थिक स्थिति खराब होने की बात कही तो आरोपियों ने पांच लाख रुपये की व्यवस्था करने को कहा। आरोप है कि 22 मई 2026 को आरोपी आयुष पांडे ने फोन कर कहा कि यदि खाते में रुपये नहीं हैं तो नगद दे दें। इसके बाद 25 मई को एक व्यक्ति राम नारायण को पांच लाख रुपये लेने भेजने की बात कही गई और पहचान के लिए एक कोड नंबर भी दिया गया। इसी दौरान उन्हें अपने साथ साइबर ठगी होने का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर क्राइम थाने पहुंचकर पूरी जानकारी पुलिस को दी।
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