सिम स्वैपिंग के जरिये खाते से पौने छह लाख उड़ाए

Newswrap हिन्दुस्तान, गाज़ियाबाद
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गाजियाबाद, वरिष्ठ संवाददाता। साइबर अपराधियों ने सिम स्वैपिंग और डिजिटल पहचान का दुरुपयोग कर एक

सिम स्वैपिंग के जरिये खाते से पौने छह लाख उड़ाए

गाजियाबाद, योगेंद्र सागर। साइबर अपराधियों ने सिम स्वैपिंग और डिजिटल पहचान का दुरुपयोग कर एक व्यक्ति के खाते से पौने छह लाख रुपये निकाल लिए। जालसाजों ने पीड़ित के नाम पर फर्जी निजी ऋण भी जारी करा लिया और उसकी रकम भी अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी। मोबाइल नेटवर्क बंद होने के कारण पीड़ित को बैंक से कोई संदेश या ओटीपी नहीं मिला और अपराधी लगातार खाते से लेनदेन करते रहे। साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मधुबन बापूधाम थानाक्षेत्र के सदरपुर गांव निवासी ओमपाल चौधरी ने साइबर थाने में दी शिकायत में बताया कि 12 फरवरी 2026 को उनका एयरटेल नंबर अचानक बंद हो गया।

शुरुआत में उन्हें तकनीकी खराबी का संदेह हुआ, लेकिन उसी दौरान साइबर अपराधियों ने उनके कोटक महिंद्रा बैंक खाते को निशाना बना लिया। जालसाजों ने उसी दिन उनके नाम पर 4.42 लाख रुपये का निजी ऋण स्वीकृत करा लिया। मोबाइल सेवा बंद होने के कारण उन्हें बैंक की ओर से ऋण स्वीकृति या खाते से रकम निकलने संबंधी कोई संदेश प्राप्त नहीं हुआ। पीड़ित के मुताबिक 12 फरवरी से 17 फरवरी के बीच खाते से लगातार रकम निकाली जाती रही। कुल 5.69 लाख रुपये विभिन्न अज्ञात खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। उन्होंने इनमें से कोई भी लेनदेन नहीं किया और न ही किसी को बैंकिंग जानकारी साझा की। पीड़ित के मुताबिक 14 फरवरी को एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सऐप पर संपर्क किया। उसने पहले उनका आधार नंबर और जन्मतिथि भेजकर भरोसा जीतने की कोशिश की। इसके बाद उसने खुद को एयरटेल का कर्मचारी बताते हुए कॉल की और बंद सिम को दोबारा चालू कराने के नाम पर उनकी मां का नाम पूछने लगा। संदेह होने पर उन्होंने कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया।ओमपाल चौधरी का कहना है कि इसके बाद वह एयरटेल के अधिकृत स्टोर पहुंचे और नई सिम जारी कराई, लेकिन वह भी सक्रिय नहीं हुई। अगले दिन फिर स्थानीय कार्यालय जाकर दूसरी सिम ली गई, मगर उसमें भी नेटवर्क नहीं आया। लगातार समस्या बने रहने पर 16 फरवरी को तीसरी सिम जारी की गई, जो 17 फरवरी को जाकर चालू हो सकी। पीड़ित ने बताया कि 21 फरवरी को बैंक कर्मचारी से बातचीत के दौरान उन्हें खाते से हुए संदिग्ध ट्रांजेक्शन और निजी ऋण की जानकारी मिली। यह सुनकर उनके होश उड़ गए। इसके तुरंत बैंक पहुंचकर खाता फ्रीज कराया और बैंक अधिकारियों से शिकायत दी। इसके बाद साइबर थाने में शिकायत दी। एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह का कहना है कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

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