Ghaziabad News: बजट के इंतजार में जिले के जर्जर स्कूलों की मरम्मत और निर्माण
Ghaziabad News: गाजियाबाद में 46 जर्जर स्कूलों की मरम्मत एक साल बाद भी नहीं हुई है। अब यह संख्या बढ़कर 85 हो गई है। बजट न मिलने से निर्माण और मरम्मत नहीं हो पा रहा है। जर्जर कक्षों में पढ़ाई जारी है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को खतरा है। शिक्षा विभाग ने बजट प्रस्ताव तैयार किया है, पर अभी तक बजट नहीं मिला।

Ghaziabad News: गाजियाबाद, गुलशन भारती। जिले में बीते वर्ष चिन्हित किए गए 46 जर्जर स्कूलों की मरम्मत एक साल बाद भी नहीं हो पाई है। इस वर्ष संख्या बढ़कर 85 तक पहुंच गई है, लेकिन बजट न मिलने से न तो निर्माण हो सका है और न ही इनकी मरम्मत कराई गई है। ऐसे में हादसे की आशंका बनी रहती है। बीते वर्ष 2025 के मानसून के दौरान जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने निरीक्षण कर 46 स्कूलों को जर्जर स्कूल के रूप में चिन्हित किया और इनमें जर्जर कक्षों, बरामदों, शौचालयों आदि के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। उसी वक्त शिक्षा विभाग ने रिपोर्ट तैयार कर बजट प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन बजट अभी तक नहीं मिल सका है। इनमें 23 स्कूल अत्यधिक जर्जर हैं, जिन्हें नए सिरे से बनाने की जरूरत है। इंडियन पैरेंट्स एसोसिएशन का आरोप है कि कई स्कूलों में शौचालय जर्जर है तो कहीं कक्षों की स्थिति बदतर है। कई स्कूलों में चारदीवारी नहीं है। कहने को जर्जर कक्षों के भीतर पढ़ाने पर पाबंदी है, लेकिन कई स्कूल ऐसे हैं जहां जगह ही नहीं है। ऐसे में बच्चे उन्हीं जर्जर कक्षों में बैठने को मजबूर हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
इस वर्ष बढ़कर 85 हो गए जर्जर स्कूलः
शिक्षा विभाग द्वारा इस वर्ष कराए गए सर्वे में जिले के 39 और स्कूलों की पहचान की गई है, जो जर्जर एवं मरम्मत योग्य हैं। इसके बाद अब जिले में कुल जर्जर स्कूल 85 हो गए हैं। कुछ स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष और शौचालय बनाने की भी मांग की गई है। वह भी जर्जर स्कूलों की सूची में शामिल हैं।
बरामदे और खुले में लग रहीं कक्षाएंः
जर्जर कक्षों, भवनों के इस्तेमाल पर रोक के बाद अब हालात ये हैं कि कहीं बरामदे और खुले में क्लास लग रही हैं तो कहीं एक-एक कमरे में दो-तीन कक्षा के बच्चे पढ़ रहे हैं। कई स्कूलों में जगह की कमी और बरामदे नहीं होने की वजह से जर्जर कक्षों में ही बच्चे बैठने को मजबूर हैं। झुंडपुरा प्राथमिक स्कूल में तीन कक्ष जर्जर हैं। यहां एक-एक कक्ष में दो कक्षाओं के बच्चे बैठ रहे हैं। मकनपुर प्राथमिक स्कूल जर्जर होने के चलते बंद है। स्कूल के बच्चे पास की धर्मशाला में एक साल से पढ़ रहे हैं। जहां जर्जर कक्षों में ही पढ़ाई हो रही है वहां बारिश के होते ही छुट्टी करनी पड़ती है।
पैरेंट्स एसोसिएशन ने उठाया सुरक्षा का मुद्दाः
दिल्ली हादसे के बाद अब इंडियन पैरेंट्स एसोसिएशन ने यह मुद्दा उठाया है। एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी का कहना है कि जिले में जर्जर स्कूलों या पीजी-हॉस्टल का ऑडिट कराना चाहिए, ताकि दिल्ली जैसे हादसे से बचा जा सके। सरकार को इसका संज्ञान लेकर स्कूलों की मरम्मत एवं निर्माण करना चाहिए।
स्कूलों में जर्जर निर्माण की स्थितिः
23 स्कूल अत्यधिक जर्जर, इन्हें नए सिरे से बनाने की जरूरत
63 स्कूलों में 122 अतिरिक्त कक्षों के निर्माण की जरूरत
7 स्कूलों में अधूरी चहारदीवारी के भरोसे सुरक्षा
6 स्कूलों में पूरी चहारदीवारी बनाने की जरूरत
शासन को बजट प्रस्ताव भेजा हुआ है। अभी बजट प्राप्त नहीं हुआ है। जल्द बजट मिलने की उम्मीद है। इसके बाद स्कूलों की मरम्मत और निर्माण कराया जाएगा। - ओपी यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी


