सड़क को लेकर किसान और सोसाइटी निवासियों के बीच बढ़ा विवाद, हंगामा
गाजियाबाद, कार्यालय संवाददाता। राजनगर एक्सटेंशन स्थित देविका स्काइपर सोसाइटी की सड़क को लेकर बुधवार की

गाजियाबाद, गुलशन भारती। राजनगर एक्सटेंशन स्थित देविका स्काइपर सोसाइटी की सड़क को लेकर बुधवार की सुबह विवाद हो गया। आरोप है कि सड़क पर लंबे समय से जलभराव और गड्ढों से परेशान होकर एक सप्ताह पहले ही मलबा डलवाया था। इसके बाद मंगलवार रात किसी ने कंक्रीट से सड़क का अस्थाई निर्माण करवा दिया, लेकिन सिहानी से कुछ लोग बुधवार सुबह जेसीबी लेकर पहुंचे और सड़क को अपनी जमीन बताकर खुदाई करवा दी। इससे दोनों पक्षों के बीच तनाव पैदा हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। राजनगर एक्सटेंशन की देविका स्काइपर वाली सड़क पर कई सोसाइटी हैं। लोगों का कहना है कि यहां से रोजाना करीब 10 हजार वाहन गुजरते हैं, लेकिन सड़क इतनी जर्जर थी कि पैदल चलना भी मुश्किल था। कुछ दिनों से एक सोसाइटी का गंदा पानी भी इसी सड़क पर छोड़ा जा रहा था, जिससे स्थिति और खराब हो गई। मजबूरन देविका स्काइपर सोसाइटी के कुछ लोगों ने मिलकर करीब एक हफ्ता पहले सड़क पर मलबा डलवा दिया। इसके बाद मंगलवार की रात किसी ने कंक्रीट से सड़क बनवा दी, लेकिन अगली सुबह ही सिहानी से आए कुछ लोगों ने सड़क की जमीन को अपना बताते हुए खुदवा दिया।
विवाद का जन्म
आरोप है कि बुधवार की सुबह करीब छह बजे सिहानी निवासी 5-6 लोग जेसीबी लेकर वहां पहुंच गए और सड़क को अपनी निजी जमीन बताकर खुदाई करवाने लगे। सूचना मिलते ही देविका स्काइपर, वीवीआईपी और गुलमोहर गार्डन सोसाइटी के लोग भी वहां पहुंचे और सड़क खोदने का विरोध किया। इससे दोनों पक्षों के बीच कहासुनी के बाद तनाव पैदा हो गया। नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना 112 पर कॉल कर पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। स्थानीय निवासी अजय सैनी के मुताबिक लोगों ने मामले की शिकायत जीडीए से की है और जल्द सड़क निर्माण की मांग की है।
धरने पर बैठे सोसाइटी निवासी
सड़क खोदने को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद विभिन्न सोसाइटी के लोगों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। तपती गर्मी के बीच कई सोसाइटी के लोग पक्की सड़क की मांग को लेकर सड़क पर ही कुर्सियां बिछाकर धरने पर बैठ गए। लोगों ने आरोप लगाया कि जीडीए से नक्शा पास कराते हुए बिल्डर ने 45 मीटर चौड़ी सड़क दिखाकर अपने फ्लैट बेचे, लेकिन पिछले 10 साल से लोग यहां रहे हैं पर अभी तक भी पक्की सड़क नहीं मिली है।
लोगों से विकास शुल्क भी इसी हिसाब से वसूला गया है। सड़क, सीवर से लेकर हर तरह का टैक्स नियमित रूप से लिया जा रहा, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। चकरोड कहलाने वाली इस सड़क पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। अधिकारी भी आते जाते हैं, बावजूद इसके पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।
जीडीए की स्थिति
उस सड़क के टुकड़े का निर्माण जीडीए ने नहीं कराया, हालांकि इस घटनाक्रम की जांच कराई जा रही है। यदि जीडीए की सड़क किसी ने क्षतिग्रस्त की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
- आलोक रंजन, मुख्य अभियंता, जीडीए


